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3 और मुस्लिम बने आतंकी, एक केमिकल इंजिनियर, दूसरा मास्टर्स और तीसरा बी-टेक

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आतंकी बुरहान वानी को तो सुरक्षाबलों ने मार गिराया, परंतु उसका इलाका त्राल आतंक की नर्सरी बनता जा रहा है । इसी क्षेत्र के चार और युवक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हो गए हैं । महबूबा सरकार ने आतंकियों की वापसी के लिए तो नीति बनाई परंतु युवाओं को आतंक की राह पर जाने से रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया है । 

सूत्रों के अनुसार पिछले एक वर्ष में इस क्षेत्र के मोहम्मद आकिब खान, मुबशिर अहमद, गोहर वानी और अशफाक खान जैश में शामिल हुए । बताते हैं कि इन्हें कारी वकास उर्फ मुफ्ती वकास नाम के एक युवक ने बहकाया है । इस क्षेत्र में पिछले कुछ समय में मारे गए आतंकियों में बुरहान वानी का नाम सबसे ऊपर है । इसके अलावा सब्जार भट्ट, अबू लल्हारी, अबू दुजाना, उमर खालिद आदि आतंकी भी इसी क्षेत्र के थे । जो सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए ।कारी, पीओके का रहने वाला है । जिसकी उम्र अभी लगभग 25 वर्ष है ।

यह भी पता चला है कि वह इस क्षेत्र में इन आतंकियों को अपने साथ रखकर ट्रेनिंग दे रहा है । हैरत की बात है कि कश्मीर में शांति का हल ढूंढने आए वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा भी अब तक त्राल नहीं गए । जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी एमएम खजूरिया ने कहा कि सरकार को इस क्षेत्र का विशेष अध्ययन कराना चाहिए ।

1- मोहम्मद आकिब खान त्राल के राजपुरा का रहने वाला है और केमिकल इंजीनियरिंग की है । आयु लगभग 22 वर्ष है । 2. मुबशिर अहमद पुलवामा के ही त्राल, पशतूना गांव का रहने वाला है । अरैबिक मास्टर की पढाई की है । आयु लगभग 25 वर्ष है । 3- गोहर वानी त्राल के ही हरमूदिर में रहने वाला गोहर ने बी टेक किया हुआ है । आयु लगभग 20 वर्ष है ।

नोट : इस्लामिक आतंक के बचाव में हमारे सेक्युलर बताते है की आतंक की वजह है गरीबी अशिक्षा, ये केवल समाज को मुर्ख बनाने का प्रयास मात्र है, जबकि कोई भी इस्लामिक आतंकी चाहे ISIS का बगदादी हो, लश्कर का हाफिज सईद हो, अलकायदा का ओसामा हो, सभी अमीर घरों से और बेहद पढ़े लिखे रहे है, और कश्मीर के जो 3 मुस्लिम आतंकी बने है वो सब भी अच्छे घरों से पढ़े लिखे है, गरीबी अशिक्षा का आतंक से कुछ लेना देना नहीं, ये पूरी तरह जिहाद, मजहब, 72 हूरों का मामला है 

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