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हिन्दुओ में भूलने की घातक बीमारी, वामपंथियों में हिन्दुओ से ज्यादा एकजुटता : शेफाली जी वैद्या

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शेफाली जी वैद्या की बात शायद बहुत लोगों को ख़राब लगे, पर हम इतना बता दें की उनकी बात कड़वी जरूर है पर बिलकुल सच है, हिन्दुओ ने दिल्ली के अंकित सक्सेना को अब  लगभग भुला दिया है, हिन्दुओ ने कासगंज के चन्दन गुप्ता को भी भुला दिया है, महाराष्ट्र में जिन्दा जला दिए गए दलित बच्चे सावन राठौर को भी लोग भूल गए है 

जबकि आज भी देश के वामपंथी सेक्युलर और जिहादी तत्व कहते रहते है, हम पहलु खान को नहीं भूलेंगे, हम अख़लाक़ को नहीं भूलेंगे, हम गौरी लंकेश को नहीं भूलेंगे, शेफाली जी वैद्या ने यही बात एक ट्वीट के जरिये की, जो आप देख भी सकते है 

शेफाली जी वैद्या की बात 100% सही है, हिन्दुओ में भूलने की घातक बीमारी तो है ही, उदाहरण के लिए आज भी कट्टरपंथी कहते है की हम बाबरी मस्जिद को नहीं भूलेंगे, पर आप देखिये हिन्दू तो उन हज़ारों मंदिरों भूल गया जिन्हे तोड़पर उनपर अवैध मस्जिदें बना दी गई, उदाहरण के लिए दिल्ली का जामा मस्जिद, किस हिन्दू को परवाह है की उसे बनाने के लिए वहां भद्रकाली के मंदिर को तोडा गया था ! 

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