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टोडरमल के दस्तावेज में भूमि के मालिक दशरथ है, सुप्रीम कोर्ट दस्तावेज के आधार पर तुरंत दे फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नवीनतम सुनवाई में कहा है की – उसे हिन्दुओ की धार्मिक भावना की चिंता नहीं है, अयोध्या केस भूमि के मालिकाना हक़ का केस है, और इसे उसी आधार पर सुना जायेगा, ठीक है सुप्रीम कोर्ट जमीन के असली मालिक को ही जमीन दे, सबसे बड़ी चीज तो ये है की इस्लाम और मुसलमान तो भारत में 800 साल पहले आये, उस से हज़ारों साल पहले से सारी जमीन तो हिन्दुओ की ही है, खैर 

रामजन्म भूमि के मालिकाना हक के बारे में सुप्रीम कोर्ट का एक लाइन में फैसला आ सकता है,शेरशाह सूरी के समय में लाला टोडरमल के भूमि सर्वेक्षण और भू राजस्व सूचि में अयोध्या की जमीन राजा दशरथ के नाम पर दर्ज है जो राम के पिता थे, इसलिए रामजन्म भूमि का मालिकाना हक रामजन्म भूमि को ही जाता है। 

उल्लेखनीय है कि लाला टोडरमल शेरशाह सूरी के नवरत्नों में से एक थे जिन्हें बाद में उसी तर्ज पर नवरत्नों की परंपरा को जारी रखते हुए मुगल शासक अकबर ने भी उन्हें अपने नवरत्नों में शामिल किया था। अकबर बाबर का पोता था। अँग्रेजों ने भी लाला टोडरमल के जमीन पैमाईश या भू सर्वेक्षण को प्रमाणिक और स्तरीय माना था और उसी आधार पर काम जारी रखा था।लाला टोडरमल के भू-अभिलेख को संरक्षित भी रखा था।

एक बात जरूर ध्यान में रखें कि डकैत जब घर को लूटता है तो हीरे जवारातों को लूटने के बाद उसकी खरीद की पक्की रसीद नहीं माँगता। वैसे ही आक्रांताओं ने रामजन्मभूमि और अन्य मंदिरों को तोड़कर मस्जिद तो बना लिए पर लैंड रेकर्ड और म्यूटेशन नहीं करवाया। रामजन्मभूमि का मामला वैसे ही है। जबरदस्ती हड़पा गया था हिन्दुओ की जमीन, और मामला जमीन के मालिकाना हक़ का है तो दस्तावेज के आधार पर सुप्रीम कोर्ट तुरंत फैसला करे 

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