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वियतनाम ने कहा था : शिवाजी जैसा योद्धा हमारे यहाँ जन्म लेता तो हम दुनिया पर राज करते !

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आपको शायद पता नहीं होगा की, दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमरीका और वियतनाम में 20 साल तक युद्ध चला है, वियतनाम एक छोटा सा एशियाई देश है, जिसने अमरीका को हराया है, आजतक अमरीका इस शर्म से ऊपर नहीं उठ सका है, ये युद्ध 1955 से लेकर 1975 तक चला  और वियतनाम इसमें विजयी रहा, अमरीका को इलाका छोड़ कर भागना पड़ा 

वियतनाम में आज भी बच्चा बच्चा शिवाजी महाराज को जानता है, शिवाजी महाराज के बारे में वियतनाम के स्कूली किताबों में पढ़ाया जाता है, वहां शिवाजी महाराज शौर्यता की निशानी के रूप में जाने जाते है , छत्रपती शिवाजी महाराज सिर्फ महान योद्धा ही नहीं थे, वे महान ईश्वर भक्त एवं देशप्रेमी भी थे। उनके उच्च चरित्र की आज भी मिसाल दी जाती है। ऐसे महापुरुषों का यश सदैव अमर रहता है। 

भारत भूमि ही नहीं, विदेशों में भी छत्रपती शिवाजी महाराज के प्रशंसक व समर्थक हैं, लोग वहां उन्हें आदर्श मानते हैं। प्रसिद्ध आध्यात्मिक पत्रिका कल्याण में उनकी गाथा से संबंधित एक सत्यकथा प्रकाशित हो चुकी है। एक छोटे-से देश वियतनाम ने जब अमरीका जैसे शक्तिशाली राष्ट्र को शिकस्त दी तो यह विश्व के इतिहास में अनोखी घटना थी। विजय के पश्चात इस युद्ध के नायक हो ची मिन्ह से पत्रकारों ने प्रश्न पूछा – आप अमरीका जैसे देश को कैसे पराजित कर सके?

इस पर मिन्ह ने जवाब दिया, अमरीका जैसी महाशक्ति को पराजित करना असंभव है, परंतु उस महाशक्ति को टक्कर देने के लिए हमने एक महान राजा के चरित्र का अध्ययन किया। उसी से हमें प्रेरणा मिली। हमने युद्ध करने की नीति बनाई और आज विजयश्री ने हमारा वरण किया है।

पत्रकारों ने पूछा, कौन हैं वे राजा? मिन्ह ने जवाब दिया, हिंदुस्तान के छत्रपति शिवाजी महाराज, अगर वे हमारे देश में पैदा हुये होते तो आज हम पूरे विश्व पर शासन कर रहे होते। इस घटना के कई वर्षों बाद वियतनाम की विदेश मंत्री भारत की राजधानी दिल्ली आईं और उन्होंने यहां के कई ऐतिहासिक स्थलों व महापुरुषों की समाधि देखी। उन्होंने पूछा, छत्रपती शिवाजी महाराज की समाधि कहां है ?

अधिकारियों ने जवाब दिया, रायगढ़। वियतनाम की विदेश मंत्री रायगढ़ पहुंचीं और उन्होंने छत्रपती शिवाजी की समाधि के दर्शन किए। साथ ही वहां की मिट्टी उठाई और अपने साथ वियतनाम ले गईं।

पत्रकारों ने जब उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, यह वीरों की भूमि है। इसी मिट्टी में छत्रपती शिवाजी व महारणा प्रताप जैसे उच्च कोटि के धर्मात्मा एवं शूरवीरों का जन्म हुआ है। इसलिए भारत की यह मिट्टी मैं वियतनाम की मिट्टी में मिलाऊंगी, ताकि हमारे यहां भी शिवाजी व महाराणा जैसे शूरवीर पैदा हों।

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