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मालदीव आज इस्लामी नहीं बल्कि होता हिन्दू राष्ट्र, राजीव खान ने बनवा दिया इस्लामी राष्ट्र

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वो समय तमिलों की दहशत का था जब तमिलो ने श्रीलंका को लगभग जीतने का प्लान बना लिया था, उस समय दुनिया के सबसे खूंखार सन्गठन के रूप में गिना जाता था LTTE जिसने अमेरिका तक को हिला कर रखा था . यद्दपि जिस प्रकार से राजीव खान ने श्रीलंका में सेना भेज कर LTTE के लडाको पर कार्यवाही की वैसे उन्होंने कभी कश्मीर के गद्दारों पर सख्ती नहीं दिखाई थी .

LTTE के तमिलों ने श्रीलंका में युद्ध के समय एक अन्य देश पर नजर लगा रखी थी और वो देश था मालदीव. यदि राजीव खान बीच में न पड़ते तो आज श्रीलंका के साथ साथ मालदीव भी तमिलों के कब्ज़े में होता . ये उस समय की बात है जब 1988 में भारतीय सेना मुख्य लड़ाके दस्ते को ऑपरेशन कैक्टस चला कर इस्लामिक मुल्क मालदीव के मुखिया को बचाने के लिए भेजा गया था .उस समय भारत उस मालदीव का रक्षक बना था जो आज चीन की गोद में बैठने को बेताब है .

ऑपरेशन कैक्टस के दौरान भारतीय सेना ने मालदीव की सीमा पार कर लिट्टे के आतंकियों से राष्ट्रपति अब्दुल गय्यूम को बचाया था। श्रीलंका के एलटीटीई यानी लिट्टे के 200 लड़ाकों ने मालदीव पर हमला करके राजधानी माले पर कब्‍जा कर लिया था । वहां के एक व्‍यापारी अब्‍दुल्‍ला लुथूफी ने राष्‍ट्रपति अब्‍दुल गय्यूम के खिलाफ लिट्टे आतंकियों के साथ मिलकर तख्‍तापलट का षड्यंत्र रचा था और LTTE के तमिल लड़ाकों को अपने देश में बुलाया था जिसे LTTE ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था . ये उस समय की बात है जब 1988 में लिट्टे के आतंकी शहर में जगह-जगह गोलीबारी करते हुए अपना कब्‍जा जमा चुके थे।

उस समय किसी तरह वहां के राष्‍ट्रपति ने नेशनल सिक्‍योरिटी सर्विस के घेरे में पनाह ले रखी थी लेकिन LTTE के लड़ाके उनकी तरफ बढ़ते ही जा रहे थे . मालदीव के राष्‍ट्रपति ने उस समय अमेरिका, ब्रिटेन, श्रीलंका के साथ साथ इस्लामिक मुल्क होने के नाते पाकिस्‍तान से भी मदद मांगी थी लेकिन LTTE के लड़ाकों के आगे कोई और देश अपनी सेना को बलिदान करवाने के लिए तैयार नहीं हुआ था . इनके अलावा भी कई पश्चिमी देशों ने कोई दखल न देने का फैसला किया। हालत ये थे कि LTTE से खुद तबाह श्रीलंका तक ने अपनी सेना को स्‍टैंडबाई मोड पर रखा था ..

एक इस्लामिक मुल्क पर तमिलों का कब्ज़ा लगभग तय था और राष्ट्रपति का जीवन थोड़े ही समय के लिए था तब राजीव खान ने फ़ौरन ही एक्शन दिखया और वो दुनिया के एकमात्र ऐसे नेता बने जिन्होंने LTTE के तमिलों के खिलाफ मालदीव के इस्लामिक शासन को बचाए रखने के लिए भारत की फ़ौज को रवाना कर दिया जो स्पेशल दस्ते के रूप में आगरा से दो हजार किलोमीटर की यात्रा कर के मालदीव में उतरी थी .

3 नवंबर, 1988 को भारतीय सेना के स्पेशल पैराशूट रेजीमेंट के 300 जवान सबसे पहले वहां के राष्ट्रपति की गुहार पर मालदीव पहुंचे और सबसे पहले हुलहुले एयरपोर्ट को LTTE लड़ाकों से अपने कब्‍जे में लिया. LTTE लड़ाकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही का आदेश लगातार राजीव गांधी की तरफ से मिल रहा था . इसके बाद धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए उन्‍होंने लिट्टे लड़ाकों से लोहा लेते हुए राष्‍ट्रपति अब्‍दुल गय्यूम को सुरक्षित निकाला। यद्दपि LTTE के लड़ाकों ने भी भारत की सेना देख कर बहुत अधिक खून खराबा करना ठीक नहीं समझा . इसके बाद कांग्रेस की सहमित और राजीव गाँधी के ही आदेश पर भारतीय सेना की और टुकडि़यां कोच्‍ची से मालदीव रवाना हुईं और LTTE की पूरी साजिश को खत्म कर डाला जिस से मालदीव का राष्ट्रपति और मालदीव का इस्लामिक शासन बचा रहा जो आज तक कायम है और वही एहसानफरामोश मालदीव खुल कर भारत के खिलाफ बयान देता हुआ चीन के साथ खड़ा हो गया है .

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