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बड़ा सवाल ये की आतंक और कट्टरपंथ के इस अड्डे पर हमारे टैक्स का पैसा कबतक उड़ाया जायेगा !!

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दिल्ली यूनिवर्सिटी, पटना यूनिवर्सिटी जैसे तमाम जगहों पर एक मुस्लिम छात्र संघ का चुनाव लड़कर अध्यक्ष बन सकता है, और बने भी है, पर क्या अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक हिन्दू कभी छात्रसंघ का चुनाव जीता है ? इसी लिए न की वहां पर सेकुलरिज्म नहीं चलता, बल्कि कट्टरपंथ चलता है !! 

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केंद्रीय यूनिवर्सिटी है, केंद्र सरकार के अनुदान से चलती है, हमारे और आपके टैक्स के पैसे से चलती है, और कट्टरपंथी धमकी देते है की इस देश के राष्ट्रपति को वो इस यूनिवर्सिटी में घुसने नहीं देंगे, इतनी असहिष्णुता !! 

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में क्या होता रहा है – अलग पाकिस्तान का आईडिया इसी यूनिवर्सिटी से निकला था, जी हां, भारत के टुकड़े कर मुसलमानो के लिए अलग देश का आईडिया इसी यूनिवर्सिटी से निकला था, और अभी हाल ही में इस यूनिवर्सिटी से हिज्बुल का आतंकी मन्नान भी निकला 

इस यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों में हिन्दू छात्रों पर अत्याचार भी होते रहे है, रमजान के महीने में हिन्दू छात्रों के खाने पीने पर रोकें लगाई जा चुकी है, यही है क्या सेकुलरिज्म, इस यूनिवर्सिटी से आतंकी निकलता है, यहाँ कट्टरपंथ और अलगाव के बीज बोये जाते है

 हमारे टैक्स के पैसे से चलने वाला ये यूनिवर्सिटी हमारे ही राष्ट्रपति की शान में गुस्ताखी करने की जुर्रत कर रहा है,  सबसे बड़ा सवाल तो ये है की आखिर कबतक आतंकवाद और कट्टरपंथ के इस अड्डे पर हमारे और आपके टैक्स के पैसे को बर्बाद किया जाता रहेगा, समाज के लोगों को अब सामने आकर कट्टरपंथ के इस अड्डे को बंद करवाने की मांग करनी चाहिए, और बंद न भी हो तो जनता के टैक्स का पैसा कट्टरपंथियों पर बर्बाद करने से रोकने की मांग करनी ही चाहिए ! 

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