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करवाचौथ को ढकोसला बताने वाली मोहतर्मा अब बेटे का कराएंगी खतना, ये बड़ा मॉडर्न सोच है !

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ये बात बिलकुल सही है की कोई दंपत्ति अपने बेटे बेटी का क्या नाम रखे, क्या संस्कार दे, ये उनका निजी हक है और दूसरे को इसमें दखल नहीं देना चाहिए, हम इस भावना का सम्मान करते है, पर करीना खान वो शख्स है जो हमारे धर्म और परंपरा के खिलाफ बयान दे चुकी है, इसी कारण ये हमारा हक़ है की हम करीना खान के बारे में भी अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल करें, ये हमारा हक है ! 

अब खबर ये आ रही है की करीना खान के बेटे तैमूर अली खान का खतना मार्च 2018 में किया जाना है, करीना खान वो शख्स है जो करवाचौथ पर कह चुकी है की ये ढकोसला है, ये पुरानी सोच है , पर शायद करीना खान को खतना बहुत मॉडर्न सोच लगता है, तभी उनके बेटे का खतना मार्च 2018 में किया जाना है



आपको खतना के बारे में बता देते है, असल में ये इस्लामी परंपरा भी नहीं है, असल में खतना इत्यादि अरब में रहने वाले यहूदियों ने शुरू की थी, इस्लाम बनाने के बाद इस्लामियों ने इस परंपरा को चुरा लिया, असल में ये कोई मजहबी परंपरा भी नहीं है, असल में होता क्या था की अरब में खूब रेत है, तो गुप्तांग की त्वचा में रेत घुस जाया करता था, उस ज़माने में आज की तरह जीन्स पैंट तो था नहीं, और अरब के देशो में खूब आंधी तूफ़ान भी आता था, पहले लोगो के पास पक्के मकान नहीं थे, तो गुप्तांग में रेत घुसता था, तो उसकी सफाई करना कठिन काम था,  पानी तो पीने के लिए भी कम था, तो यहूदियों ने खतना करना शुरू कर दिया, पर ये मजहबी परंपरा सी बन गयी 

खतना की भारत में बिलकुल भी जरुरत नहीं है, भारत में ऐसी परंपरा इसलिए नहीं आयी क्यूंकि यहाँ पानी की कोई कमी नहीं थी, और गुप्तांग को आसानी से पानी से साफ़ किया जा सकता है अगर उसमे रेत मिटटी जैसी कोई समस्या आती है, भारत में खतना की कोई जरुरत नहीं है, वैसे अरबी देशों में भी अब खतने की जरुरत नहीं है, क्यूंकि अब तो सबके पास पक्के मकान है, अच्छे कपडे है, सो गुप्तांग में रेत घुसे ऐसी समस्या अब नहीं झेलनी पड़ती, पर ये अब एक मजहबी परंपरा बन गयी है, जो की शुद्ध गैर प्राकृतिक है, पर करवचौथ को ढकोसला बताने वाली करीना खान अपने बेटे के खतने को बड़ा मॉडर्न मानती है ! 

वैसे सवाल यहाँ ये भी उठता है की तैमूर तो अभी काफी छोटा है, फिर उसका मजहब मुस्लिम ही रहेगा ऐसा क्यों ? क्यों नहीं उसे बड़ा होने दिया जाता 18+ ताकि वो खुद तय कर सके की उसका धर्म क्या होगा, उसे जबरन मुसलमान ही क्यों बनाया जा रहा है !! इतने छोटे बच्चे पर जबरन एक मजहब क्यों थोपा जा रहा है, वो खुद तय करे जब वो व्यस्क हो जाये ! 

इतने छोटे बच्चे के शरीर का कोई भाग काटने से पहले उसकी इज़ाज़त क्या मायने नहीं रखती, उसकी इज़ाज़त के बिना उसपर अत्याचार करना क्या मॉडर्न सोच है !! 

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