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अंबेडकर को नाम एक ब्राह्मण ने दिया, पढाई क्षत्रिय ने कराई, तब जाकर अंबेडकर कुछ बन सके !

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ये सब जानकारियां आपसे जानबूझकर छिपाई जाती है, हम अक्सर देखते है की लोग सोशल मीडिया पर गुमराह हुए पड़े है, और इसी कारण हमे ये पोस्ट आज करना पड़ रहा है, दैनिक भारत के पाठकों को जागरूक तो होना ही चाहिए, आप शायद यकीन न करे पर ये “अंबेडकर” नाम, सरनेम कोई दलित सरनेम नहीं है 

जी हां, अंबेडकर असल में महाराष्ट्र में ब्राह्मणो का सरनेम है, अंबेडकर ब्राह्मण सरनेम है, और महाराष्ट्र में आपको जो लोग आज अंबेडकर मिलेंगे वो ब्राह्मण होते है न की दलित, भीमराव का असल सरनेम तो “महार” था, भीमराव महार, हम ऐसा नहीं कह रहे है की भीमराव भी ब्राह्मण थे, वो थे दलित ही, पर उनका ये अंबेडकर सरनेम ब्राह्मणो का सरनेम है 

और एक ब्राह्मण ने ही गरीब भीमराव को संभाला और अंबेडकर नाम उनको दिया, और आज वो भीमराव अंबेडकर के  नाम से जाने जाते है, ये अंबेडकर नाम उनको ब्राह्मण ने दिया, इसके अलावा हम आपको ये भी बता दें की अंबेडकर के पास इतना पैसा कहाँ था की वो पढाई करते, वकालत करते, चूँकि वो एक अच्छे छात्र थे, इसलिए बड़ोदरा रियासत के मराठा महाराजा सयाजी गायकवाड ने उनको पढाई में मदद की,  उनकी वकालत करवाई, नया जीवन दिया और इसी कारण भीमराव एक वकील बन पाए, और उसके बाद उन्होंने जीवन में जो किया उसने पीछे बड़ोदरा राज्य के क्षत्रिय महाराज ही थे ! 

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एक तरह से आप सयाजी गायकवाड को भीमराव का अभिभावक भी कह सकते है, अंग्रेजी में “गार्जियन”,  दलित नेता जो असल में दलितों के मन में हिन्दुओ के प्रति नफरत भरने का धंधा करते रहते है वो इस राजा के बारे में दलितों को कभी नहीं बताते, आंबेडकर को आंबेडकर बनाने वाले है एक क्षत्रिय मराठा हिन्दू राजा थे, दलितों को हिन्दुओ के खिलाफ भड़काने वालो को जरा शर्म करना चाहिए, ये लोग जय मीम का नारा लगाते है, मुगलो और मुस्लिम हमलावरों ने सबसे अधिक नरसंहार भारत में दलित हिन्दुओ का ही किया  वहीँ शिवाजी महाराज हो, वीर सावरकर हों सभी ने दलितों की रक्षा की

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