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राम मंदिर का पूरा प्लाट तैयार, कांग्रेस और कट्टरपंथियों दोनों का पत्ता साफ़, ध्यानपूर्वक पढ़िए

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सभी मित्रों से अनुरोध है कि इस पोस्ट को गम्भीरता पूर्वक जरूर पढ़ें :—- राम मंदिर , मुसलमान, मिलार्ड और विश्वराजनीति : राम मंदिर पर आंतरिक कूटनीति इस समय चरम पर है। मजे की बात यह है कि इसमें हर पक्ष को यह लग रहा है कि मोदिया उनको उल्लू बना रहा है और सबसे ज्यादा परेशान हैं 

चार समूह — 1– मुसलमान, 2– कांग्रेस , 3–मी लोड , 4– फेसबुक के फ़ूफे (जो  बात बात पर मुँह फुला लेते है), राम जन्म भूमि का मामला अब केवल भारत का आंतरिक मामला नहीं रहा । इस मामले से अब भारत में हिंदुओं और मुस्लिमों की नियति तय होगी इसलिये विश्व की हर शक्ति इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुचि ले रही है । आपको क्या लगता है शिया बोर्ड और शिया लोग राम मंदिर का समर्थन हिंदुओं से अचानक पैदा हुये प्रेम के कारण कर रहे हैं ? अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप वाकई पकौड़े तलने की ही काबिलियत रखते हैं ।

शियाओं के इस राम प्रेम का कारण है उनके आका ईरान की सऊदी वहाबियों से दुश्मनी । ईरान ने भारत से ईराक और सीरिया की सरकार के समर्थन और अमेरिकी प्रतिबंधों के विरुद्ध भारत का गुपचुप समर्थन खरीदा है और यही कारण है कि ईरान के विरुद्ध आग उगलता अमेरिका अचानक चुप हो गया है । बदले में भारत को मिला है चाबहर और राम मंदिर पर भारत के शियाओं के समर्थन । जी हां भारत के शियाओं का राम मंदिर पर समर्थन उनके ईरानी आकाओं के निर्देश का परिणाम है ।

अब बचे सुन्नी और पाकिस्तान जिनको निस्तेज बनाने का काम मोदी ने सऊदी अरब से तगड़ी सौदेबाजी करके कर दिया है । फिलस्तीन मसले पर भारत के परंपरागत समर्थन और सीरिया में भारत की चुप्पी के बदले सऊदी अरब ने इजरायल पर चुप्पी साध ली है और भारत के सुन्नियों विशेषतः वहाबियों की कान उमेठे हैं । प्रमाण के तौर पर घटनाओं को याद करें — भारत का यू एन में फिलस्तीन के पक्ष में मत , सऊदी अरब का अपनी वायुसीमा को इजरायल जामे वाले भारतीय विमान के लिये खोलना और

सुन्नी वक्फबोर्ड के कट्टरतावादी सुन्नी सदस्य मौलाना सलमान नदवी जो बगदादी को अभिनंदनपत्र तक भेज चुका है , का मंदिर समर्थन में बयान । यानि मोदी ने अपनी कूटनीति में गृह , विदेश और रक्षा मामलों का ऐसा कॉकटेल बनाया है जिसके फार्मूले का किसी को नहीं पता और सभी इसके अनजाने स्वाद से डर रहे हैं ।

अब भारत के मुस्लिमों के सामने दो रास्ते बचे हैं — 1- प्रथम रास्ता है अदालत के फैसले का इंतजार जिसमें हमारे मी लोड लोग खुद बुरी तरह फंस गये हैं इसीलिये जिस तरह उन्होंने अयोध्या को भूमिविवाद की तरह लिया है नाकि ऐतिहासिक विवाद की तरह , तो उससे लगता है कि मेरे लोड भी सेफ गेम खेल रहे हैं और वे खुद मामले को 2019 तक लटकाना चाहते हैं, अगर वे चाहें तो शिया बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराये गये राजा दशरथ के नाम के खसरे व खतौनी ट्ठा शिये वक्फ बोर्ड के दावे के आधार पर हिंदुओं के पेक्ष में फैसला कर सकता है और अगर चाहें तो सुन्नी वक्फबोर्ड के मालकियत के दावे को मान्यता दे मुस्लिमों के पक्ष में भी । 

अब अगर मुस्लिमों के पक्ष में निर्णय आता है तो सभी अच्छे से जानते हैं भाजपा संसद में शाहबानो मामले की तर्ज पर कानून बनाएगी और कांग्रेस की भैंस पानी में , 2019 में मोदी सुपर बहुमत से वापसी और कृष्ण जन्म भूमि , ज्ञानवापी सहित कई मंदिरों सहित समा नागरिक संहिता पर अदालती आदेश मानने की मजबूरी हो जायेगी । अब अगर हिंदुओं के पक्ष में निर्णय आता है तो भी हिंदुओं में जबरदस्त उत्साह आयेगा और मुस्लिमों का जरा सा भी विरोध जो होगा ही , वह ध्रुवीकरण की लहर पैदा करेगा और मोदी 2019 में वापस ।

मुस्लिमों के सामने ‘घर वापसी’ या ‘गृह युद्ध’ के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा और समर्थन के लिये होंगे केवल चीन , तुर्की और पाकिस्तान । अरब देशों को इतनी अहमियत देने का मूल कारण मुस्लिमों के संभावित विद्रोह की आर्थिक व नैतिक कमर तोडना है ताकि चीन व मुस्लिम गठजोड़ में दरार डाली जा सके 
 यही कारण है कि राहुल गांधी अब अमेरिकी दूतावास जाने की बजाय चीनी दूतावास में उठना बैठना कर रहा है और पाकिस्तानी थिंक टैंक मोदी के विरुद्ध खुलेआम कांग्रेस के पक्ष में कोशिश करने का आह्वान कर रहा है ।राफेल सौदे पर हल्ला मचाना उसी रणनीति का हिस्सा है ताकि राममंदिर मुद्दे से पहले ही मोदी को घेर लिया जाये ।

2– द्वितीय रास्ता है हर हालात में संभावित हार को देखकर सौदेबाजी करना जिसमें मस्जिद के लिये जमीन , समा नागरिक संहिता को ठंडे बस्ते में डालना और अन्य किसी भी तोड़े गये मंदिर को वापस ना मांगने की शर्त होगी । पर ये लोग यह भूल रहे हैं कि इस वक्त वे सरदार पटेल के बाद हिंदुओं की सबसे कुटिल राजनैतिक मेधा का सामना कर रहे हैं जिसका नाम मोदी है । तो अगर भाजपा ने इसे हिंदुओं के हित में सुलझा लिया तो कांग्रेस का विनाश तय है और भारत में हिंदुत्व की वो लहर उठेगी जिसपर सवार होकर भाजपा अगले कई दशकों तक सत्ता में रहेगी और उसे चुनौती देने की क्षमता होगी किसी एक दम नई पार्टी में जो भाजपा से कईगुना हार्ड हिन्दुत्व लाइन पर चलेगी जिससे मजबूर होकर भाजपा को हिंदू राष्ट्र की दिशा में चलना ही पड़ेगा ।

चीन के कौटिल्य सुन त्सु ने कहा था एक अच्छा सेनापति वह है जो बिना जंग लड़े युद्ध जीत ले, पर क्या है कि फेसबुकिये फ़ूफ़ाओं को परिणाम में नहीं मारधाड़ में ज्यादा रुचि है । इन्हें राम मंदिर और राष्ट्रीय हितों की बजाय मोदी को निर्देशित करने में ज्यादा रुचि है । जाओ रे जाओ । तुम लोग पकौड़े तलो या मास्टरी के फॉर्म भरो , मोदी को राम मंदिर और राष्ट्र निर्माण करने दो ।

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