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फ्रांस में नेपोलियन के बारे में बताया जाता है, भारत में शिवाजी महाराज के बारे में नहीं : फ्रेंच लेखक

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1947 में मुस्लिमो ने भारत के 3 टुकड़े किये, जिसमे सेक्युलर और वामपंथियों ने भी उनका साथ दिया 
और 1947 में आखिरकार अंग्रेज भारत छोड़कर भाग गए , अब उसके बाद भारत का संविधान, कानून सब अंग्रेजी और मुगलई मानसिकता वाले गाँधी-नेहरू ने ही बनाये, भारत का पहला शिक्षा मंत्री था एक मुस्लिम महजबगुरु जिसका नाम था “मौलाना” आज़ाद 

सभी स्कुल कॉलेज में वामपंथियों की लिखी किताबे पढाई जाती रही, आज भी अधिकतर जगह पर ऐसा ही है, ये वामपंथी अकबर जो की एक आतंकवादी था उसे महान बताते रहे , लुटेरे बाबर की गाथा गाते रहे, भारत में बच्चों ने भी यही सब पढ़ा और नतीजा ये है की आज 2017 में भारत में बड़ी आबादी सेक्युलर है, जो अकबर को महान जानती है , खैर, फ्रेंच लेखक फ्रांशस गौतीर ने देखें भारत की ताजा स्तिथि पर क्या कहा 


बता दें की फ्रांशस गौतीर मूल रूप से फ्रांस के लेखक व् पत्रकार है परन्तु कई सालों से भारत में रह रहे है , फ्रांशस गौतीर ने बताया की फ्रांस में हर बच्चे को नेपोलियन के बारे में पढ़ाया जाता है बताया जाता है, 
परन्तु भारत में शिवाजी महाराज के बारे में विरले ही बच्चों को पढ़ाया जाता है जबकि शिवाजी महाराज तो नेपोलियन से कहीं अधिक महान थे 

आपको बता दिए की अधिकतर लेखक वामपंथी है जो किसी कीमत पर शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं के बारे में नहीं बताना चाहते , चूँकि फिर इन वामपंथियों के माई बाप यानि मुग़ल और अन्य मुस्लिम हमलावर कम महान जो दिखने लगेंगे 

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