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मीमो पर भरोसा करना पड़ेगा भीमो को भारी, अभी भी नहीं होते सचेत तो चुकानी पड़ेगी भारी कीमत !

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इतिहास से अगर आप कुछ नहीं सीखते तो आपका अंत निश्चित है, आपको फिर बता दें की जिन्नाह ने जब सरकार बनाई थी तो पाकिस्तान में एक दलित नेता को भी मंत्री बनाया गया था, वो नेता था जोगेंद्रनाथ मंडल

पाकिस्तान बनने से पहले भी ये दलित-मुस्लिम एकता की बातें की जाती थी, और जोगेंद्रनाथ मंडल जैसे लोगों ने जिन्नाह और मुस्लिम लीग का खूब साथ दिया, और पाकिस्तान बनने पर जोगेंद्रनाथ मंडल को मंत्री भी बनाया गया था, पर एक बार पाकिस्तान बन गया, दलितों का धर्मांतरण, दलित महिलाओं का बलात्कार, ये  पाकिस्तान और बांग्लादेश में आजतक चल रहा है 

पाकिस्तान में 24% हिन्दू थे, और असल बात ये है की इनमे 90% दलित ही  थे, जोगेंद्रनाथ की तो बुरी गत हो गयी, और दलितों को पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान जो की आज बांग्लादेश है, वहां मिटा दिया गया, आज भी पाकिस्तान में  1% हिन्दू है, असल में उनमे भी अधिकतर दलित ही है, जहाँ उनपर आज भी अत्याचार चल रहा है

ये दलित मुस्लिम एकता की बात आज भी की जाती है, जिग्नेश मेवानी, भीम आर्मी जैसे लोग आज के जोगेंद्रनाथ मंडल है, जो जय भीम और जय मीम का नारा लगवा रहे है, पर दलित समाज के लोग अगर इतिहास से नहीं सीखते तो भारी कीमत उन्हें आने वाले समय में चुकानी पड़ेगी 

अभी 2 उदाहरण सामने आये, उत्तर प्रदेश में गौतम नगर को इस्लाम नगर बना दिया गया, वहां के दलितों को भगाया गया, भीषण अत्याचार किये गए, पहले इस इलाके में दलित अधिक थे, तो जय भीम और जय मीम चल रहा था, जैसे ही मुस्लिम अधिक हुए तो “सिर्फ मीम” हो गया, और दलितों का जीना हराम कर  दिया गया 

दूसरा उदाहरण तो अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मीम वालों ने दिया, AMU में मीम वालो ने दलित राष्ट्रपति का विरोध किया, और उनको न घुसने देने की धमकियाँ दी, दलित समाज के लोग जिन्हे जिग्नेश मेवानी जैसे आज के जोगेंद्रनाथ मंडल “जय भीम जय मीम” का डोज देते है, वो इस ज्यादा गलतफमी में न रहे अन्यथा इतिहास में भारी कीमत चुकाई, आगे भी कीमत चुकानी पड़ेगी 

आपको एक बड़ी जानकारी ये भी दे दें की 1971 से पहले जब बांग्लादेश नहीं था, तो पूर्वी  पाकिस्तान में 24 लाख हिन्दुओ का क़त्ल  कट्टरपंथियों ने किया था और इसमें 90% लोग दलित ही थे, यानि 24 लाख में लगभग 22 लाख मरने वाले लोग दलित ही थे, असल में ये लोग पूर्वी पाकिस्तान में जोगेंद्रनाथ मंडल की बातों में आकर रह गए, पर सत्ता पाते ही इनका कत्लेआम किया गया ! 

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