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RSS न होता तो भारत शब्द तक मिट जाता और आज ये देश सबसे बड़ा इस्लामिक मुल्क होता !

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आये दिन आप टीवी डिबेट में सेक्युलर प्रवक्ताओं द्वारा ये बोलते हुए सुनते है की आरएसएस का देश की आज़ादी में कोई योगदान नहीं है, कुछ तो आरएसएस को अंग्रेजो का एजेंट बताते है, फिर कुछ कहते है की आरएसएस का देश में कोई योगदान इत्यादि नहीं है

आपकी जानकारी के लिए बता दें की अंग्रेजो ने 15 अगस्त 1947 को सत्ता भारतीयों को सौंप दी थी, उनकी दूसरे विश्व युद्ध के बाद उनकी स्तिथि कमजोर थी, उनका देश टुटा पड़ा था, अब इन सेकुलरों के अनुसार आरएसएस के लोग अंग्रेजो के एजेंट थे, तो सबसे बड़ा प्रश्न तो यही है की अंग्रेजो ने अपने एजेंटों यानि आरएसएस वालो को सत्ता क्यों नहीं सौंपी, अंग्रेजो के साथ घूमने वाले नेहरू-गाँधी को सत्ता क्यों सौंपी ?

क्यूंकि असल कारण ये था की नेहरू और गाँधी ही अंग्रेजो के एजेंट थे, और कांग्रेस पार्टी तो स्वयं अंग्रेजो की बनाई हुई पार्टी थी, अंग्रेज जब भारत से गए तो अपने एजेंट नेहरू गाँधी को भारत की सत्ता सौंप गए, ताकि अपरोक्ष रूप से उनकी सत्ता बाद में भी चलती रहे, और आप जानकर हैरान हो जायेंगे की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से पहले भारत का संसद में जो बजट पेश होता था वो सिर्फ अंग्रेजी में और शाम के समय पेश होता था 

वो इसलिए क्यूंकि जब भारत में शाम होती थी तो ब्रिटैन में 11-12 बजते थे, अंग्रेजो की सुविधा के लिए भारत में शाम को बजट पेश किया जाता थे, ये थे हालात, अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे बदला और तब से अबतक दिन में 11 बजे ही भारत का संसद में बजट पेश होता है, खैर अब बात करते है आरएसएस के योगदान की 

अगर आरएसएस न होता तो न होता जनसंघ और न होती आज बीजेपी और न होते मोदी, और बीजेपी और मोदी न होते तो आप जानते ही है क्या होता, बाबरी मस्जिद अभी भी अपनी जगह पर होती, और राम मंदिर की तो बात ही छोड़िये, मस्जिद होता राम की जन्मभूमि पर, कांग्रेस ने 60 साल राज किया और देश के हर शहर में मिनी पाकिस्तान बना दिए, केरल बंगाल कश्मीर असम जैसे इलाके बना दिए, पर गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान इत्यादि में हालात थोड़े बेहतर है, और उसका कारण ये है की इन चार राज्यों में आरएसएस सक्रिय था, आरएसएस न होता तो आज गुजरात भी निश्चित बंगाल जैसा ही होता, और हर शहर में मिनी पाकिस्तान नहीं बल्कि बड़े बड़े पाकिस्तान बने होते 

आरएसएस न होता तो आज भी सत्ता में कांग्रेस ही होती, कांग्रेस को रोकने वाला कोई नहीं होता, और ऐसी हालत में भारत में हम हिंदी नहीं बल्कि उर्दू पढ़ रहे होते, और ये काफी है बताने के लिए की आरएसएस का देश में क्या योगदान है ! 

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