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गनीमत है की आ गए योगी, वरना यूपी को आग के भट्टे पर बिठा चुके थे अखिलेश, लागू करवा रहे थे शरिया

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उत्तर प्रदेश का इस्लामीकरण कर चुके थे अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश का इस्लामीकरण कर चुके थे अखिलेश यादव

अखिलेश यादव की एक आदत है वो उत्तर प्रदेश के हर काम का श्रेय लेते है पर स्कूलों के इस्लामीकरण पर अपने मुह में जैसे टोटी डालकर बैठ गए है

उत्तर प्रदेश इस्लामीकरण की ओर बढ़ रहा था, अखिलेश यादव के राज में मायावती के राज से भी स्तिथि दयनीय हो गयी थी, ये तो गनीमत है की 2017 में प्रदेश में योगी सरकार आ गयी अन्यथा पुरे उत्तर प्रदेश के इस्लामीकरण का कार्यकर्म चल रहा था


बिना प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की मदद के कोई काम किसी प्रदेश में हो ही नहीं सकता, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद से खुलासा हुआ की कई सरकारी स्कूलों को इस्लामिक स्कुल बना दिया गया

जब ये मामला पकड़ा गया तो स्थानीय कट्टरपंथियों ने कहना शुरू किया की स्कुल का नाम तो ऐसा अंग्रेजो के ज़माने से है, ये बात सरासर झूठ है, क्यूंकि हर प्राथमिक स्कुल का रजिस्ट्रेशन होता है, और हर स्कुल का डिटेल स्थानीय डीएम के पास होता है

स्कुल को पेंट किया जाता है उसके बोर्ड बनाये जाते है पेंट से नाम लिखा जाता है ये सब सरकारी पैसे से होता है, और पैसा कहाँ खर्च किया जा रहा है इसका हिसाब प्रशासन के पास होता है, स्कूलों के सिर्फ नाम में “इस्लामिया” जैसे शब्द नहीं जोड़े गए

बल्कि इन स्कूलों में शरिया भी लागू कर दिया गया, अब सरकारी स्कुल में टीचर और प्रिंसिपल तो सरकारी कर्मचारी ही होते है, सरकार ही इन्हें नियुक्त करती है क्या इन सरकारी टीचर और प्रिंसिपल को नहीं पता की देश में स्कूलों की छुट्टी रविवार को होती है पर इन स्कूलों में छुट्टियाँ तो शुक्रवार को दी जा रही थी

साफ़ है की कट्टरपंथी स्कूलों का अपने इलाके में इस्लाम्मिकरण करके बैठे हुए थे और इस्लामिक स्कूलों की तरह इन्हें चला रहे थे, और हिन्दू बच्चों पर भी नमाज़ कुरआन और इस्लाम थोप रहे थे, जहाँ इनकी संख्या अधिक होती है ऐसा ही काम ये लोग करते है

पहले तो देवरिया के कुछ स्कूलों का मामला सामने आया जहाँ 7 स्कूलों के नाम में इस्लामिया शब्द जोड़ा गया था, ये सभी स्कुल मुस्लिम बहुल इलाकों में थे, योगी सरकार हरकत में आई तो अब पूरी उत्तर प्रदेश में 46 ऐसे सरकारी स्कुल सामने आ गए है जिनके नाम में इस्ल्मिया शब्द जोड़ा हुआ था

और सिर्फ इस्लामिया शब्द ही नहीं बल्कि ये स्कुल भी शरिया कानून से चल रहे थे शुक्रवार को छुट्टी, नमाज़, कुरआन इत्यादि – ये सबकुछ सरकारी स्कूलों के सिलेबस में नहीं है, इन सभी स्कूलों का इस्लामीकरण कर दिया गया था

और ये पूरा खेल अखिलेश यादव की सरकार के दौरान हुआ, योगी सरकार के आने के बाद भी लगभग डेढ़ साल बाद ये सामने आ रहा है और कार्यवाही की जा रही है

आपकी जानकारी के लिए बता दें की जब अखिलेश यादव का राज था तब भी सरकारी अधिकारी डीएम इत्यादी वो ही थे जो आज योगी राज में है, अब इन्ही सरकारी अधिकारियो और अखिलेश सरकार ने तो इस्लामीकरण को मंजूरी दी थी, अखिलेश की सरकार तो चली गयी पर इलाकों में सरकारी अधिकारी तो वही रहे जिन्होंने इस्लामीकरण को चलने दिया

अब योगी आ भी गए तो भी इस्लामीकरण चलता रहा, रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जाती रही, और इलाके के डीएम और अन्य अधिकारी इसलिए चुप रहे की मामला योगी तक न पहुंचे चुपचाप चलता रहे, वरना योगी अधिकारीयों से भी जवाब पूछेंगे तो ये बोलेंगे क्या

इसी कारण योगी सरकार में भी डेढ़ साल लग गए ऐसे मामलों को सामने आने में, और अबतक 46 ऐसे स्कुल पकडे गए है जहाँ शरिया नियम चलाया जा रहा था, इस मामले में योगी सरकार अब एक्टिव हुई है और अब कार्यवाही की जा रही है, अभी और कितने ऐसे स्कुल पकडे जायेंगे ये देखने वाली बात होगी

पर जिस तरह एक के बाद एक मुस्लिम बहुल इलाकों में स्कूलों के इस्लामीकरण का मामला सामने आ रहा है उस से साफ़ होता है की अखिलेश यादव और अन्य सेक्युलर सरकारों ने देश का क्या हाल किया हुआ थे, ये लोग देश के इस्लामीकरण को बढ़ावा समर्थन और संरक्षण दे रहे थे और सरकारी स्कूलों में शरिया चलाया जा रहा था

वो तो गनीमत है की प्रदेश में योगी सरकार आ गयी तो अब ऐसे स्कूलों पर कार्यवाही हो रही है अगर सेक्युलर सरकारें ही रहती तो अन्य स्कूलों का भी धीरे धीरे इस्लामीकरण होता ही रहता

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