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दूध कारोबारी नहीं था अकबर खान, पहले भी गौ तस्करी के केस, गाय ले जाने के लिए रात का ही समय क्यों

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राजस्थान के जिस अलवर में 7 बच्चों के अब्बू अकबर खान जिसे कथित तौर पर गौरक्षको ने मार दिया, उसे मीडिया बिलकुल निर्दोष और मासूम बता रही है, साथ ही मीडिया उसे दूध कारोबारी भी बता रही है, और बताया जा रहा है की वो तो गाय पालक था 

पर असल चीज ये है की अकबर खान कोई भी गाय पालक नहीं था, और न ही उसका दूध बेचने का कोई कारोबार था, न ही वो दूध बेचा करता था, हां उसपर गौ तरकारी के पहले से कई केसेस थे, और गौ तस्करी के अलावा भी उसका पूरा आपराधिक रिकॉर्ड था 



वैसे अकबर खान को गौ रक्षको ने ही मारा इस बात का कोई सबूत मीडिया के पास नहीं है, मीडिया अकबर के साथी असलम की बात को सच मानकर कुछ भी बता रही है – असलम वो शख्स है जिसने कहा की वो अकबर के साथ पैदल पैदल 2 गाय लेकर जा रहा था, तभी 6-7 लोगों ने मारना शुरू कर दिया, वो जान बचाकर भाग गया पर अकबर को लोगों ने मार दिया 

 मीडिया के पास कोई सबूत नहीं है की अकबर को गौ रक्षको ने ही मारा, दूसरी चीज ये की असलम को बताना होगा की अकबर तो दूध कारोबारी था नहीं तो रात के अँधेरे में ये दोनों 2 गायों को लेकर कहाँ जा रहे थे, इनका दूध का कारोबार नहीं, और गाय ले जाने के लिए भी रात का ही समय 

यक़ीनन किसी को मारा जाना सही नहीं है, पर मीडिया ये किस आधार पर बता रही है की अकबर निल्कुल निर्दोष और मासूम था, जबकि उसके ऊपर पहले से गौ तस्करी के केसेस थे, इसके अलावा अकबर और असलम दूध कारोबारी भी नहीं है, तो रात के समय 2 गाय किस उद्देश्य से और कहाँ लेकर जा रहे थे, मीडिया किस आधार पर कह रही है की अकबर को गौ रक्षको ने ही मारा है, और किस आधार पर अकबर को बिलकुल निर्दोष और मासूम बताया जा रहा है 

और इस पुरे काण्ड के बाद देश और दुनिया में हिन्दू समाज को लेकर “आतंक, तालिबान” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, साफ़ होता है की मामले की असलियत कुछ और है और मीडिया उसे कठुवा काण्ड की तरह ही सनसनी बनाकर हिन्दू समाज को बदनाम करने की सुपारी लेकर काम कर रही है, इस मामले की NIA जांच की जरुरत है क्यूंकि जैसे जैसे लोकसभा चुनाव आयेंगे, इस तरह की घटनाएं और होने की सम्भावना है ताकि सत्ता विरोधी लहर को बनाया जा सके, जिसका फायदा विपक्ष के दलों को मिले 

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