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क्या कानून सच में सबके लिए बराबर है ? मीलार्ड की बातें और आदेश सुनकर तो नहीं लगता

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क्या कानून सच में सबके लिए बराबर है ?
क्या कानून सच में सबके लिए बराबर है ?

कितना अच्छा डायलॉग मारा जाता है न बार बार – कानून सबके लिए बराबर है, कानून की दृष्टि में सब बराबर है, कानून किसी से भेदभाव नहीं करता , और भी कई तरह के डायलॉग

पर ये सभी बातें फ़िल्मी डायलॉग से ज्यादा कुछ नहीं है क्यूंकि ऐसा कुछ है ही नहीं, कानून क्या सबके लिए बराबर है, पता नहीं किसको इस बात पर भरोसा होता है, हमे तो नहीं होता


ऊपर ग्राफिक में हमने देश के मिलार्ड द्वारा कही हुई 2 बातें लिखी है, वैसे ये सिर्फ 1 उदाहरण है, मिलार्ड धर्म के आधार पर अलग अलग मामलों में 2 तरह की बातें कई बार कह चुके है

अभी सावन का महीना चल रहा है, इस महीने में हिन्दू समाज का कांवड़ त्यौहार होता है, जब भी हिन्दू समाज का कोई त्यौहार होता है मीडिया सेक्युलर वर्ग बुद्धिजीवी वामपंथी तत्व बदनाम करने के लिए कोई न कोई एजेंडा चलाते ही है, और मिलार्ड भी अब इन मामलों में एक्टिव है

मिलार्ड ने अभी आदेश दिया है की जो कांवड़िये कानून तोड़े उनपर बहुत ही सख्त कार्यवाही करें, जबकि ये ही मिलार्ड कश्मीर के पत्थरबाजों पर केंद्र सरकार को कह चुके है की पैलेट गन का इस्तेमाल न करें

पत्थरबाज वो होते है जो मजहबी नारे लगाकर भारत विरोधी नारे लगाकर पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाते है, ये लोग ड्यूटी कर रहे भारतीय सैनिको पर हमले करते है, जान से मारने की कोशिश करते है, बेशक पत्थरबाज आतंकवादी होते है पर मिलार्ड उनके लिए सख्त कार्यवाही नहीं चाहते, पर कांवड़ियों पर मिलार्ड को सख्त कार्यवाही चाहिए

अब आप खुद बताइये की क्या कानून सबके लिए बराबर है ? हमारे हिसाब से तो ये सिर्फ एक फ़िल्मी डायलॉग है जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है

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