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भैंस पूँछ उठाएगी तो गोबर ही करेगी, और राहुल गाँधी जब भी मुह खोलेंगे गोबर ही करेंगे, गाना नहीं गायेंगे

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National Kid of India Rahul Gandhi
National Kid of India Rahul Gandhi

National Kid of India Rahul Gandhi  : मित्रों, प्रेम चोपड़ा का एक प्रसिद्ध डायलाॅग है कि…”भैंस जब पूँछ उठाएगी तो गोबर ही करेगी, गाना नही गायेगी”, हमारे 49 साल के राष्ट्रीय बालक जब जब मुँह खोलते हैं, तब तब यह डायलाग अनायास ही याद आ जाता है।

फिलहाल #नामदार विदेशी दौरे पर है। वो कहते है न कि जब भी जहाज के डूबने का खतरा होता है तो सबसे पहले चूहें अपनी जान बचा कर जहाज से दूर भागते हैं। हमेशा जब कभी “राष्ट्रीय आपदा” आती है, तब नामदार भारत छोड़ कर विदेश में नमूदार होते है।


जिस मोदी जी को ये जर्मनी में निकम्मा बता रहे थे #वो 15 अगस्त के थकाऊ कार्यक्रम को सम्पन्न कर अगले दिन अटलजी की अंतिम यात्रा में पैदल चल रात को केरल में मोर्चा सम्हाल रहे थे।

तब नामदार मसान जाने से अंग भारी होने के कारण दो पेग लगाकर अगले दस घण्टे बिस्तर के हवाले थे।

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फिर नामदार ने ट्वीट कर सेवा-दल को केरल जाने का निर्देश दिया, यह जानते हुए कि “अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम” और बजाय खुद केरल जा कर राहत कार्यो में सेवादल का नेतृत्व करने के जर्मनी रवाना हो गया।
इस आपदा के समय जब कांग्रेस केरल बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग कर रही है, तब ‘कांग्रेस अध्यक्ष’ जर्मनी कैसे चले गए?

नामदार जी.. राष्ट्र का निर्माण सेवा-संकल्प और कठोर परिश्रम के मजबूत ताने-बाने से होता है, न कि षड्यंत्रों और दुरभिसंधियों के तीतर फन्दों से।

फिर जब जर्मनी में उन्होंने पूँछ उठाई तो अब तक का सबसे बदबूदार गोबर करते हुए कहा कि “यदि अल्पसंख्यकों को, दलितों को, भारत के बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध नही कराये गये तो वे आतंकवादी बन जायेंगे।” और अपनी इस चंडूखाने की फांकते समय उन्होंने #ISIS का उदाहरण भी दिया। #आप_भी_तो_बेरोजगार_है_क्या_आप_भी..?

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इटली के टिकली, हम क्रुसेड और जेहाद संस्कृति वाले लोग नही हैं। जब हम बेरोजगार होते है तो पकोड़े तलते है, इंसान नही तलते।

जैसे जैसे वक्त गुजर रहा है #इसके भाषणों में मासूमियत की जगह मक्कारी प्रगट हो रही है। भारत के प्रति इनकी सोच और विषाक्त होती जा रही है, और यह जानबूझकर “मेरी दीवार भले ही गिर जाए पर पड़ोसी की बकरी दबना चाहिए” नीति के तहत किया जा रहा है। भारत की अखंडता, एकता और स्वाभिमान की कीमत पर भी “मोदी जी” की कुर्सी चली जाय बस। फिर तो सब जमा लेगें, #जब_मिल_बैठेगें_चालीस_चोर।

अब जब भारत के गिनती के प्रांतों में इनकी सरकार बची है और चुनाव में वोटर तो छोड़िए कार्यकर्ताओं को भी खड़ा करने लायक फंड पार्टी के पास नही आ रहा है, तब एक ही रास्ता है कि मोदी के भय से थर-थर कांपते और भारत में अपने पैर जमाने में असफल विदेशी आतंकी संगठनों और भारत विरोधियों की आर्थिक मदद प्राप्त की जाए।

इसी मिशन के तहत “मोतीलाल वोरा” को कांग्रेस कोषाध्यक्ष के पद से हटाकर #अहमद_पटेल को उनकी जगह बैठाया गया है, ताकि “चिड़ी अंडा गुपचुप” का खेल हो सके।

इस हेतु #सिद्धू को पाकिस्तान भेजा गया क्योंकि वे जानते है कि “मोदी सरकार” को हटाने में पाकिस्तान खुद का पेट काट कर भी #कांग्रेस को पैसा देगा। इस रूट को लीक प्रूफ बनाने के लिए #शकील_अहमद को जम्मू कश्मीर का सचिव बनाया गया।

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इस हेतु #शशि_थरूर को केरल के बहाने चंदा मांगने विदेश पहुंचाया, ताकि विदेशी पैसा भारत सरकार के मार्फत राज्य सरकार तक पहुंचे और फिर इस केरल रिलीफ फंड में राज्य की #कम्युनिस्ट_सरकार (जो कांग्रेस की सहयोगी है) घावली करके चुनाव फंड जुटा सकें क्योंकि मोदी सरकार तो पैसे की जगह सीधी राहत सामग्री दे रही है और NGO के खातों में सीधा पैसा आने का रास्ता मोदी जी बन्द कर चुके हैं और राज्य का सबसे बड़ा ‘चंदे का सोर्स’ #रबर_उद्योग खुद इस बाढ़ से बीस हजार करोड़ के गड्ढे में आ गया, अतः उसमें तो गुंजाइश है नही।

और इस हेतु #नामदार जर्मनी में अपने भाषण द्वारा सभी आतंकी, भारत विरोधी, हिन्दू विरोधी संगठनों को कांग्रेस शासित भारत में उनके सुनहरे भविष्य के प्रति आश्वस्त कर रहे हैं।

लेकिन एक बात हमारी भी याद रखना.. अध्यक्षजी,
“अगर परछाईयाँ कद से और बातें औकात से बड़ी होने लगे, तो समझ लो कि सूरज डूबने ही वाला है।”

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