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जज की बीवी के अर्बन नक्सलियों से संबंध, हाई कोर्ट ने किया था अर्बन नक्सली की गिरफ़्तारी का विरोध

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usha ramanathan
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usha ramanathan : ये बेहद गंभीर मामला है, हमारी अदालतों को साफ़ करने के लिए अब गंभीर होना ही होगा, महाराष्ट्र पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश कर रहे 5 अर्बन नक्सलियों को गिरफ्तार किया था

इन नक्सलियों को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दे दी थी और गिरफ़्तारी पर रोक लगाते हुए इनको नजरबन्द दे दिया था, पर सुप्रीम कोर्ट से पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 1 नक्सली की गिरफ़्तारी का विरोध किया था


दिल्ली हाई कोर्ट की ताकत दिल्ली में चलती है, पुलिस ने दिल्ली से भी एक अर्बन नक्सली गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया था, और इसी नक्सली की गिरफ़्तारी का विरोध दिल्ली हाई कोर्ट ने किया था

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इस हाई कोर्ट के जज है मुरलीधर, ये गौतम नवलखा की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे, इनकी पत्नी का नाम है उषा रामनाथन, ये उषा रामनाथन जो है वो अर्बन नक्सलियों से जुडी हुई है

उषा रामनाथन द वायर नामक अर्बन नक्सली पोर्टल के साथ काम करती है, इसके अलावा अर्बन नक्सली संगठन एमनेस्टी इंडिया से भी जुडी हुई है, इसके अलावा गौतम नवलखा जिसकी गिरफ़्तारी पर दिल्ली हाई कोर्ट सवाल उठा रहा था उस गौतम नवलखा के साथ भी उषा रामनाथन ने वामपंथ का काम किया है

2008 LASSNet Conference, speaking against AFSPA जैसे कई वामपंथी और देशद्रोही प्रोजेक्ट में उषा रामनाथन ने अर्बन नक्सली गौतम नवलखा के साथ काम किया है, दोनों काफी सालों से जुड़े हुए है

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इतना ही नहीं उषा रामनाथन के जो पति है जज मुरलीधर ये वही है जिन्होंने पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को जमानत दी थी, इसके साथ साथ उषा रामनाथन द वायर जैसे नक्सली पोर्टल में आर्टिकल भी लिखती है

 


अब आप आसानी से समझ गए होंगे की अर्बन नक्सली की गिरफ़्तारी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल क्यों उठाये थे, और कार्ति चिदंबरम जैसों को जमानत दिल्ली हाई कोर्ट से कैसे मिल जाती है

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ये है हमारे अदालतों का असल सच, अब इसके खिलाफ किसी की हिम्मत नहीं बोलने या लिखने की, देश में कानून नहीं मीलार्ड का राज है कब जेल में डाल दे, इस देश का सिस्टम इतनी बुरी तरह वामपंथियों मिशनरियों ने कब्जाया हुआ है जिसका अंदाजा जनता को है ही नहीं, मोदी जैसे लोग 5 सालों में इस देश का क्या करेंगे, कम से कम 25 साल चाहिए स्तिथि को सामान्य बनाने के लिए

रात को कोर्ट के दरवाजे आतंकियों और नक्सलियों के लिए, रोहिंग्यों के लिए कैसे खुलते है ये आप समझ सकते है अब !

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