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आतंक की पैरवी करने वाले पत्रकारों को म्यांमार ने तोडा, 2 को 7-7 के लिए जेल में डाला, सीखे भारत

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myanmar doing excellent work against terrorism
myanmar doing excellent work against terrorism

myanmar doing excellent work against terrorism : म्यांमार भले ही आर्थिक और सैन्य मामले में ज्यादा बड़ा देश न हो, पर म्यांमार ने दिखा दिया है की कुछ करने की इक्षा होनी चाहिए, संकल्प होना चाहिए

म्यांमार जिसपर सभी इस्लामिक देशों ने खूब दबाव बनाया, सभी तरह के विदेशी शक्तियों ने दबाव बनाया, सभी तरह की NGO, कथित मानवाधिकार वालों ने दबाव बनाया पर म्यांमार ने आतंक के खिलाफ अपनी कार्यवाही जारी रखी


म्यांमार ने पहले रोहिंग्या जिहादियों को तोडा, आतंकियों की बड़े पैमाने पर सफाई की, और अब म्यांमार आतंकवाद परस्त पत्रकारों को तोड़ रहा है, वो भी बिना किसी दबाव में आये हुए

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सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि आतंकवाद परस्त पत्रकार और बुद्धिजीवी जो की मिशनरियों और जिहादी संगठनो से पैसा खाकर काम करते है, ऐसे आतंकवाद परस्त लोग म्यांमार में भी है

आतंकवाद की पैरवी और सरकार तथा देशके खिलाफ नफरत फैलाने के मामले में म्यांमार ने रायटर्स नामक एजेंसी के 2 पत्रकारों को 7-7 साल के लिए जेल में डाल दिया है, ये दोनों पत्रकार म्यांमार के ही नागरिक है, पर अपने ही देश के खिलाफ पत्रकारिता कर रहे थे

वा लोन (32) और क्याव सोए ओ (28) ये दोनों ही रोहिंग्या मसले पर विदेशी ताकतों के इशारे पर म्यांमार के खिलाफ पत्रकारिता के नाम पर नफरत फैला रहे थे, ये आतंकियों के हमदर्द की तरह काम कर रहे थे, आतंकीयो की पैरवी करते हुए सेना और सरकार के खिलाफ नॉन स्टॉप एजेंडा चला रहे थे

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पर म्यांमार ने दोनों को पकड़ा और इनपर मुकदमा चलाया गया जहाँ अदालत ने दोनों को दोषी पाया और 7-7 साल के लिए अब इन दोनों देशद्रोही पत्रकारों को जेल में बंद कर दिया

भारत म्यांमार से काफी बड़ा और ताकतवर देश है और जिसने देश्दोर्ही पत्रकार म्यांमार में नहीं है उस से अधिक तो भारत के हर राज्य में ही है, भारत म्यांमार से काफी कुछ सीख सकता है, भारत में पत्रकारिता के नाम पर दलाल भारत और सेना के खिलाफ नफरत फ़ैलाने का काम रोजाना ही करते है, भारत को भी म्यांमार से सीख लेते हुए देशद्रोही, सेक्युलर और वामपंथी पत्रकारों और बुद्धिजीवियों पर कार्यवाही करनी चाहिए !

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