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राफेल डील में रोबर्ट वाड्रा का नाम, अपने दोस्त को दिलाना चाहते थे ठेका, ताकि हो मोटी कमाई

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Robert Vadra rafale deal
Robert Vadra rafale deal

Robert Vadra rafale deal : राफेल डील पर कांग्रेस के लगातार हमलावर रुख पर पलटवार करते हुए बीजेपी ने बड़ा खुलासा किया. इस डील से जुड़ी खबर में पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जीजा रॉबर्ट वाड्रा का नाम सामने आया है.

बीजेपी का आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा अपने दोस्त संजय भंडारी को यह कॉन्ट्रेक्ट दिलवाना चाहते थे. पार्टी ने कहा है कि भंडारी और वाड्रा कई डिफेंस डील में साथ देखे गए थे.बीजेपी ने कहा कि राफेल डील पर राहुल गांधी के झूठ का पर्दाफाश करेंगे. वहीं इस मामले में सूत्रों के हवाले से खबर है कि जेपीसी यानि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी नहीं बनाई जाएगी क्योंकि ये मामले सीवीसी यानि सेंट्रल विजिलेंस कमीशन और सीएजी दोनों की नजर हैं.


बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने मीडिया को बताया, ‘संजय भंडारी की कंपनी और रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को पूर्व की यूपीए सरकार बिचौलिए के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती थी. जब ये नहीं हो सका तो आज कांग्रेस इस डील को खत्म करके इसका बदला लेना चाहती है.’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को ये जवाब देना पड़ेगा कि किस कारण ये राजनीति की जा रही है.’

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उन्होंने बताया, ‘राफेल डील के अनुसार एयरक्राफ्ट खरीदे जाने थे. 18 एयरक्राफ्ट रेडी टू यूज़ कंडीशन में खरीदे जाने थे. खाली एयरक्राफ्ट की कीमत और लोडेड एयरक्राफ्ट की कीमत अलग-अलग बताई है.

यूपीए ने पांच सौर छबीस करोड़ में खाली एयरक्राफ्ट को ख़रीदा जाना था उस मंहगाई की दर पर ,उस दर के अनुरूप जिस कीमत में मिलना था वो अभी के सरकार की डील में 9 प्रतिशत सस्ता था. फुली लोडेड एयरक्राफ्ट की बात करें तो लगभग लगभग बीस प्रतिशत कम है.’

बीजेपी नेता ने कहा, ‘जब आईफोन लांच हुआ था तब इसकी कीमत कम थी क्योंकि ये बेसिक वर्जन था. दस साल बाद नई तकनीति और दाम की तुलना क्या की जा सकती है.’शेखावत ने कहा, ‘कांग्रेस इस डील पर सवाल उठाकर वायुसेना के मनोबल को कमजोर करने का काम कर रही है. इसके लिए देश विरोधी ताकतों से भी हाथ मिलाने में उन्हें कोई गुरेज नहीं है.’

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Robert Vadra rafale deal : उन्होंने कहा, ‘संजय भंडारी का नाम जानते होंगे रॉबर्ट वाड्रा. वाड्रा और भंडारी कई डिफेन्स डील और एक्सपो में साथ देखे गए थे , पिछली डील में वाड्रा चाहते थे की वो डील उनकी कम्पनी के माध्यम से की जाए , उनकी कंपनी मंहगी दरों पर काम कर रही थी ,

वो चाहती थी डसाल्ट और भारत के बीच में इनकी कंपनी बिचौलिए बने ,संजय भंडारी और वाड्रा के हित के कारण देश के रक्षा हित से समझौता किया गया. यही कारण है ,ये बताना भी है दोबारा हम सत्ता में आने वाले हैं और अपने किसी जान पहचान वाले को दिलाएंगे.’

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