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2008 – राहुल गाँधी की सरकार ने अबू सालेम को पकड़ने वाले अधिकारी को हटाकर दागी अफसर को बनाया था CBI प्रमुख

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Congress and CBI
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Congress and CBI : अलोक वर्मा नाम के शख्स को बड़ी ही चालाकी से कांग्रेस ने सीबीआई में फिट करवाया, अलोक वर्मा कांग्रेस का रक्षक बना हुआ था, और अब राहुल गाँधी इसी बात से परेशान है की उनको और उनके पुरे गैंग को बचाने वाला ही नहीं होगा तो उनका क्या होगा 

कांग्रेस की मदद बीजेपी की टीम 160 भी करती है, इसी 160 टीम ने सीबीआई के प्रमुख पद पर मोदी को गुमराह करते हुए अलोक वर्मा को बिठाया, मोदी को दिखाने के लिए अलोक वर्मा की नियुक्ति का कांग्रेस ने पहले खूब विरोध किया था, मोदी की आँख में मिटटी डालने के लिए ही अलोक वर्मा का कांग्रेस ने विरोध किया था, अब ये कांग्रेस अलोक वर्मा के साथ खडी है, चलिए आपको हम कुछ और बताते है


राहुल गांधी जी, अब देश को यह भी बता दीजिए, …IPS अश्विनी कुमार में वो कौन सी ख़ूबियाँ थीं, जिनके दम पर उन्हें एक अगस्त 2008 को आपकी सरकार ने सीबीआई का डायरेक्टर बना दिया था। वह कई शिकायतों में घिरे थे। हिमाचल में कांग्रेसी नेताओं की सरपरस्ती में रहते कई केस रफ़ा-दफ़ा करने के भी आरोप थे।

जबकि इनवेस्टिगेशन में शानदार ट्रैक रिकॉर्ड वाले 1972 बैच के एमएल शर्मा का क्या क़ुसूर था, जो एक साल सीनियर होने के बाद भी आख़िरी वक्त में बनते-बनते रह गए। फिर सीबीआई में दो साल रहते अश्विनी ने ऐसा क्या गुल खिलाया, जिसकी वजह से आपने, सोनिया जी और मनमोहन जी ने मिलकर उन्हें मार्च 2013 में नागालैंड का राज्यपाल बना दिया। सीबीआई के इतिहास में यह पहला मौक़ा था, जब किसी निदेशक को रिटायरमेंट के बाद इतना बड़ा पद दिया गया।

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Congress and CBI : एमएल शर्मा सिर्फ सीनियर ही नहीं ‘आउटस्टेंडिंग’ और ‘नो नॉनसेंस’ अफसर थे। यह हम नहीं कहते, उस दौरान गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी कहती है, जिसने उनके नाम को इसी टिप्पणी के साथ आगे बढ़ाया था। मगर कुमार की गांधी परिवार के प्रति अपार निष्ठा सीबीआई में तब नंबर दो रहे शर्मा की तमाम क़ाबिलियत पर भारी पड़ी। एक अगस्त को जब हिमाचल के डीजीपी अश्विनी कुमार को डायरेक्टर बनाने की घोषणा हुई तो सीबीआई के टॉप क्लास के अफसर ही नहीं, समूची ब्यूरोक्रेसी भी हैरान रह गई थी।

वजह कि सीबीआई में ही ज़िंदगी के 20 साल गुज़ारने के बाद भी शर्मा इस ‘काजल की कोठरी’ में भी बेदाग़ रहे, जहाँ माना जाता है कि ईमानदार से ईमानदार अफसर का भी दामन किसी न किसी केस में दाग़दार हो ही जाता है। साख ऐसी थी कि सीबीआई चीफ विजयशंकर के आख़िरी दिन से पहले सीबीआई डायरेक्टर के रूप में उनके नाम की घोषणा को महज़ औपचारिकता माना जा रहा था।

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शर्मा ही वह अफसर थे, जिनकी बदौलत अबू सलेम को भारत लाया जा सका। उपहार सिनेमा, प्रियदर्शनी मट्टू हत्याकांड, मुंबई बम ब्लॉस्ट जैसे तमाम चर्चित मामलों की जाँच कर केस अंजाम तक पहुँचाने वाले अफसर को वरिष्ठता के बाद भी उसका हक़ क्यों नहीं मिला? आज सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को इंसाफ़ दिलाने के लिए मैदान में डटे राहुल गांधी को क्या इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहिए ?

Congress and CBI : सवाल इसलिए खड़ा हुआ कि जिस सीबीआई में आज अयोग्य और दाग़ी अफसरों की नियुक्ति पर हल्ला मचाया जा रहा, उसी तरह का खेल आपकी सरकार क्यों खेलती रही? आपको बधाई देता हूँ आज विपक्षी नेता की हैसियत से आपका सशक्त रूप देखा।

मगर राहुल जी आप भी नैतिकता की खोखली बुनियाद पर खड़े हैं….बिना नैतिक शक्ति के हल्ला तो मचाया जा सकता है मगर न छाप छोड़ी जा सकती है और न ही संघर्ष को प्रभावी बनाया जा सकता है। — साभार – नवनीत मिश्रा

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