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सैनिको के नाम पर भी भयानक राजीतिक दलाली कर रही है कांग्रेस, इतनी नीचता कहाँ से आती है

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Congress on One Rank One Pension
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Congress on One Rank One Pension : अब राहुल गांधी ने रक्षा कर्मियों के लिए OROP का वादा किया है, रफाल के बाद अब राहुल गांधी ने वन रैंक वन पेंशन के नाम पर नौटंकी शुरू की है, जिसमें उन्होंने राजनीतिक महत्वकांक्षा से भरे हुए रिटायर्ड सेना के अधिकारी सतबीर सिंह को अपना मोहरा बनाया है, और उन्हें आगे कर नौटंकी की जा रही है,

राहुल गांधी ने कहा है कि सेना को अभी वन रैंक वन पेंशन नहीं मिला है, और सत्ता में आने पर कांग्रेस पार्टी ओआरओपी देगी, जैसा कि यह एक झुठा वादा है और उनसे ऐसे बेवुनियाद वादे की ही उम्मीद है ….. और इतिहास यह साबित भी करता है कि यह कांग्रेस ही थी जिसने ओआरओपी और हमारी रक्षा सेवाओं का मजाक उड़ाया था।


Congress on One Rank One Pension :  🙌 यहां हर किसी के संदर्भ के लिए ओआरओपी टाइमलाइन निम्नलिखित है।

📌ओआरओपी या ‘वन रैंक, वन पेंशन’ रक्षा बलों के कर्मचारियों को पेंशन देने का आधार था।

📌स्वर्गिय पीएम इंदिरा गांधी ने 1973 में तीसरे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत इसे समाप्त कर दिया।

📌1973 में, सरकारी कर्मचारियों की पेंशन 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई थी। लेकिन, सशस्त्र बलों के कर्मियों की पेंशन 70 प्रतिशत से घटकर अंतिम वेतन के मुकाबले 50 प्रतिशत कम हो गई थी।

📌1986 में चौथे वेतन आयोग ने इस आधार पर ओआरओपी को खारिज कर दिया कि सिविल पेंशनभोगी इसकी मांग कर सकते हैं।

📌1991 में, शरद पवार समिति ने ओआरओपी को खारिज कर दिया, लेकिन एक बार वेतन वृद्धि को मंजूरी दे दी।

📌1996 में 5 वें वेतन आयोग ने ओआरओपी को खारिज कर दिया।

📌2002 में, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस को पोल मैनफिस्टो (घोषणापत्र) में ओआरओपी जोड़ने के लिए कहा।

📌2006 में 6 वें वेतन आयोग ने ओआरओपी को खारिज कर दिया और सिविल एवं सैन्य के बीच एक कड़वा संघर्ष शुरू कर दिया जिसने विरोध प्रदर्शन की श्रृंखला को शुरू किया।

📌2008 में, वेटरन नागरिकों ने जंतर मंतर पर तेजी से रिले फास्ट किया उन्होंने अपने पदक और पुरस्कार को भी वापस करने का फैसला किया परंतु सरकार ने उनके प्रोटेस्ट को नजरअंदाज कर दिया।

📌2009 में, वेटरन नागरिक राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिलने गए थे तो राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन लोगों से मिलने से इंकार कर दिया था तो वे वेटरन नागरिक राष्ट्रपति के कर्मचारियों के सामने अपने पदक और अपने बहादुरी पुरस्कार आत्मसमर्पण कर दिए थे।

Congress on One Rank One Pension : 📌2011 में, के संजय प्रभु ने राजीव चंद्रशेखर (जो की बैंगलोर के निवासी और राजस्थान से सांसद थे ) को ओआरओपी के मामले को राज्यसभा समिति को संदर्भित किया गया था उनको थैंक्स कहना तो बनता है।

📌एके एंटनी के तहत रक्षा मंत्रालय ने वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी मुद्दों का हवाला देते हुए ओआरओपी को खारिज कर दिया।

📌प्रणव मुखर्जी के तहत वित्त मंत्रालय ने ओआरओपी को खारिज कर दिया, जिसमें प्रतिवर्ष 8,000 से 9, 000 करोड़ रुपये के बड़े प्रभाव (ह्युज इम्पलीकेशन) का हवाला दिया गया।

📌डाॅक्टर मनमोहन सिंह के तहत कार्मिक, लोक शिकायतें और पेंशन मंत्रालय ने ओआरओपी को खारिज कर दिया और कहा कि इससे अन्य सिविल पेंशनभोगियों की इसी तरह की मांगें पैदा होंगी।

📌मंत्रालयों के उपरोक्त सभी अवलोकनों के बावजूद, तत्कालीन बीजेपी सांसद भगत सिंह कोष्यारी की अगुआई वाली समिति ने ओआरओपी में योग्यता देखी और दृढ़ता से इसकी सिफारिश की।

📌जुलाई 2012 में, तत्कालीन प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने रक्षा बलों के वेतन और पेंशन को देखने के लिए एक और समिति की स्थापना की। लेकिन, पैनल ने ओआरओपी मुद्दे से परहेज किया।

📌सितंबर 2012 में, यूपीए सरकार ने रक्षा कर्मियों के वेतन और पेंशन संरचना में वृद्धि के लिए 2300 करोड़ रुपये के धन आवंटित किए।

📌 2013 में, नरेंद्र मोदी लोगों की नजरों में आए और हरियाणा के रेवाड़ी में पूर्व सैनिकों की एक बड़ी रैली में उन्होंने ओआरओपी का वादा किया।

Congress on One Rank One Pension : 📌मोदी की इस घोषणा ने यूपीए सरकार को जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए मजबूर किया। उन्होंने अप्रैल 2014 से ओआरओपी को लागू करने के लिए फरवरी 2014 में घोषणा की और इसके लिए 500 करोड़ रुपए आवंटित किए। निर्णय अगली सरकार के लिए छोड़ दिया गया था।

📌2014-15 में किए कई वादों के बावजूद, मोदी सरकार इस मुद्दे पर सर्वसम्मति तक पहुंचने में नाकाम रही। फिर वित्त मंत्रालय ने भी कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बाधा डाली। प्रधान मंत्री ने फिर से वादा किया कि वह मांग को पूरा करेंगे, जो उनके पूर्ववर्तियों द्वारा नहीं किया गया था।

📌ओआरओपी प्रोटेस्ट, जो जून में जंतर मंतर में शुरू हुआ, ने स्थिति बदल दी। कांग्रेस और “आप” पार्टियों ने भी इस बहस में अपने को शामिल कर लिया। प्रधान मंत्री मोदी ने फिर से वादा किया। स्वयं सेवी संगठन आरएसएस ने सरकार से तुरंत इसकी घोषणा करने को कहा।

📌अंत में, 5 सितंबर, 2015 को ओआरओपी की घोषणा की गई।

📌रक्षा मंत्री और वयोवृद्धों के बीच एक बैठक के बाद वीआरएस और पूर्व परिपक्व सेवानिवृत्ति (पीएमआर) पर आखिरकार विवाद हल हो गया।

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📌लाभ 1जुलाई, 2014 से प्रभावी रूप से दिया गया है। वर्तमान सरकार ने 26 मई, 2014 को पद संभाला था और इसलिए, यह निर्णय लिया गया है कि इस योजना को तुरंत एक तारीख से प्रभावी बनाया जाए।

📌चार अर्ध-वार्षिक किश्तों में बकाया भुगतान किया जाएगा। युद्ध विधवाओं सहित सभी विधवाओं को एक किश्त में बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।

📌आरंभ करने के लिए, ओआरओपी कैलेंडर वर्ष 2013 के आधार पर तय किया जाएगा।

Congress on One Rank One Pension : 📌2013 में न्यूनतम और अधिकतम पेंशन के औसत के रूप में उसी रैंक में सेवानिवृत्त सभी पेंशनभोगियों के लिए पेंशन फिर से तय की जाएगी। औसत से ऊपर आने वाले पेंशन को संरक्षित किया जाएगा।

📌जो व्यक्ति स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हो जाता है उसे ओआरओपी योजना के तहत शामिल नहीं किया जाएगा।

📌भविष्य में, पेंशन हर 5 साल फिर से तय की जाएगी।

📌खजाने की अनुमानित लागत 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है और भविष्य में बढ़ेगी।

📌सरकार ने हर पांच साल में एक समीक्षा का प्रस्ताव दिया है, वेटरन नागरिकों की वार्षिक समीक्षा की जानी चाहिए। उनका विवाद यह है कि एक वरिष्ठ अधिकारी जूनियर अधिकारी से कम पेंशन कभी नहीं प्राप्त कर सकता है।

📌सरकार ने शुरू में कहा था कि “स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति” लेने वाले सैनिक ओआरओपी के हकदार नहीं होंगे। इसने रा नर्व को कम से कम 40% सैनिकों को जल्दी से रिटायर कर दिया। सरकार ने कहा है कि केवल जो लोग योजना लागू होने से पहले सेवानिवृत्त हुए हैं, वे ओआरओपी के हकदार होंगे।

📌ओआरओपी के विभिन्न पहलुओं को देखने के लिए सरकार द्वारा स्थापित एक सदस्यीय न्यायिक पैनल, जिसमें अंतर-सेवा मामलों सहित, ने अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है, जिसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

Congress on One Rank One Pension : अब बात निकली है तो चलिए मैं आपको इस विषय पर सत्य से अवगत करा देता हूं, तो भैया बात है वर्ष 1971 की जब भारतीय सेना ने तत्कालीन ईस्ट पाकिस्तान पर कब्जा कर लिया था और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व का सबसे बड़ा सरेंडरकराकर पाकिस्तान की नाक धूल में रगड़ दी थी, 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को 25,000 भारतीय सैनिकों ने सरेंडर करने के लिए बाध्य कर दिया था और भारतीय सेना को इस उपलब्धि का इनाम राहल गांधी की दादी इंदिरा गांधी ने 1973 में भारतीय सेना की पीठ में खंजर भोंक के दिया और उनसे वन रैंक वन पेंशन छीन लिया,

उस युद्ध के भारतीय सेना ने इंदिरा गांधी के हाथ में दो तुरूप के पत्ते दिए थे एक था पूरा ईस्ट पाकिस्तान जिसे रणनीतिक रूप से भारत में विलय करा कर अखंड बंगाल बना देने की आवश्यकता थी, और दूसरा था भारत के पास गिरवी पड़े पाकिस्तान के 93हजार सैनिक, जिनके बदले भारत अपना कश्मीर वापस ले सकता था,

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किंतु राहुल की दादी इंदिरा ने वार्ता की मेज पर दोनों ही गंवा दिए, बिना कश्मीर वापस लिए 93000 सैनिक वापस कर आई और भारत के बगल में एक नया इस्लामिक मुल्क बंगलादेश बनवा दिया, और दंड दिया भारतीय सेना को उनसे वन रैंक वन पेंशन छीनकर,

Congress on One Rank One Pension : उसी समय के बाद से सेना के लोगों द्वारा वन रैंक वन पेंशन पुनः बहाली की मांग करी जाती रही है और 1973 से 2014 के बीच आई सरकारों ने आश्वासन तो अवश्य दिए, किंतु लागू किसी ने भी नहीं किया, 40 वर्षों तक वन रैंक वन पेंशनकी मांग कांग्रेस ने लटकाए रखी और देश के सैनिकों को फॉर ग्रांटेड लिया,

और आज कांग्रेस के मालिक राहुल गांधी नामक पाखंडी वन रैंक वन पेंशन की बात कर नौटंकी आ कर रहे हैं, जबकि यह मांग 40 वर्ष पुरानी थी और 2004 से 2014 तक, यानी 10 वर्ष तक राहुल गांधी और इनकी मां सोनिया गांधी के हाथों में हीसत्ता थी और ये दोनों पूर्ण रूप से सक्षम थे कि वह वन रैंक वन पेंशन पुनः लागू कर सकें, तो फिर क्या कारण था कि कांग्रेस, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उस समय सैनिकों की इस मांग पर ध्यान नहीदिया और वन रैंक वन पेंशन की मांग ठंडे बस्ते में पड़ी रही, सम्भवतः कांग्रेस देश को लूटने, हिंदुओं को आतंकवादी साबित करने और घोटालों में अत्यधिक व्यस्त थी उस समय,

परन्तु 2014 के चुनाव से पूर्व वन रैंक वन पेंशन की मांग जोर पकड़ने लगी और राहुल गांधी की कांग्रेस ने पुनः देश के सैनिकों के साथ छल किया और 2300 करोड़ के फंड के आवंटन की घोषणा कर दी और 500 करोड़ आवंटित कर दिए, किंतु कुछ भीपेपर पर नहीं था कोई ब्लू प्रिंट नहीं था और इसे लागू करने की कोई योजना भी नहीं बनाई गई थी

फिर वर्ष 2013 में अपने चुनावी कैंपेन में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन देने का वचन दिया और 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी नीत भाजपा सरकार ने इस ओर कदम उठाए और सितंबर 2015 में इसकी घोषणा करी और इसकोजुलाई 2014 से प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया, अब क्योंकि फंड बहुत बड़ा था तो निश्चय हुआ कि चार किस्तों में इसका भुगतान किया जाएगा और हर 5 वर्ष े बाद पुनः पेंशन की समीक्षा की जाएगी, इसमें लगभग 12000 करोड का खर्च आया, आप सोचिए जिस OROP के लिए कांग्रेस ने मात्र 23 सौ करोड़ की घोषणा की थी उसका असली खर्च 12 हजार करोड़ आया और भविष्य में यह अभी और भी बढ़ेगा,

Congress on One Rank One Pension : किंतु कांग्रेस और राहुल गांधी अपने ही कठपुतली सतवीर सिंह को प्रयोग कर देश में या भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि वन रैंक वन पेंशन अभी तक नहीं मिला,

मैं घोटालेबाज राहुल गांधी के इस दावे की पोल खोलने के लिए रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के ट्वीट और उनके वक्तव्य पोस्ट कर रहा हूं, आप स्वयं पढ़ लीजिए और देख लीजिए कि उनके विचार वन रैंक वन पेंशन के विषय पर क्या है और सतवीर सिंह पर क्या है,

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अंत में मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारतीय सेना और सेना से जुड़े लोगों का मेरे मन में पूरा सम्मान है किंतु सतवीर सिंह जैसे लोग जो OROP के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं और 2015 से उन्ही लुटेरे गांधी परिवार और कांग्रेसका समर्थन करते आ रहे हैं जिन्होंने 1973 में वन रैंक वन पेंशन छीना था,तो भैया ऐसे व्यक्ति के प्रति मेरे मन में रत्ती भर भी सम्मान नहीं है।

Congress on One Rank One Pension : 🙌 अब आप लोग सभी बिंदुओं को एक बार फिर से पढ़ें, स्वंय देखें किसने वादे पूरे किए हैं और किसने हमारी डिफेंस फोर्सेज (रक्षा बलों) को पीछे छोड़ दिया है।

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