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कांग्रेस नेता और उसकी मुस्लिम बीवी ने जो लुट का कारनामा कर दिया, वैसा फिल्मो में भी नहीं होता

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Congressi Banti Babli Sachin Upadhyay Nazia Yusuf
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Congressi Banti Babli Sachin Upadhyay Nazia Yusuf : बॉलीवुड़ में तो आपने बंटी–बबली का खूब नाम सुना होगा लेकिन भैया, हकीकत में भी एक ऐसे पति–पत्नी हैं, जो बंटी–बबली की तरह लोगों को ही नहीं बल्कि पंजाब नेशनल बैंक तक को चूना लगा गए और किसी को कानोंकान खबर तक ना हुई। हैरानी की बात तो ये हैं कि ये बंटी – बबली कोई आम नहीं बल्कि उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का भाई सचिन उपाध्याय और उसकी पत्नी नाजिया युसूफ है।

जिस तरह से बंटी – बबली ने ताजमहल बेचा, उसी तरह ये दोनों WIC क्लब की मेंबरशिप बेच रहे हैं। वैसे इन दोनों का कारनामा देखकर तो बंटी–बबली भी शर्मिंदा हो जाएं। इस बात में कोई दोहराय नहीं है कि कांग्रेस और भाई – भतीजावाद का चोली – दामन का साथ है, कांग्रेस अपनी छवि सुधारने की कितनी भी कोशिश कर लेकिन संरक्षणवाद की इस राजनीति से अपना पीछा नहीं छुड़ा पाई।


यही कारण है कि उत्तराखंड कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के भाई सचिन उपाध्याय ने ना सिर्फ लोगों को लाखों – करोड़ों का चूना लगाया बल्कि पिछले कई सालों से शासन – प्रशासन की नाक के नीचे अवैध तरीके से अपना कारोबार चला रहा है। चलिए हम आपको बताते हैं इन दोनों मियां – बीवी के काले कारनामों की करतूत।

पहला कारनामा अपने पार्टनर से धोखाधड़ी

यूं ही नहीं कहा जाता कि राजनेताओं और जमीन के सौदों में बहुत गहरा रिश्ता होता है। अधिकतर सारे घोटाले और आरोप जमीनी सौदों से जुड़े हुए होते हैं। जब हम देश के कद्दावर राजनेताओं की बात करते हैं तो उसमें नेशनल कांग्रेस के राबर्ट वार्ड्रा, जिन्हें कांग्रेस अक्सर भारत का एक सामान्य नागरिक मानती हैं, उनका संबंध भी जमीनी सौदौं के घोटाले से था, ऐसे में कांग्रेस के अन्य नेता क्यों पीछे रहें। इनके घर में भी तो प्राइवेट सिटीजन यानी भाई – भतीजे हैं, जो जमीनी सौदौं से जुड़े होते हैं। ये भाई – भतीजे भी किसी मामले में पीछे नहीं है, ये भी अपने कद्दवर राजनैतिज्ञ रिश्तेदारों के आशीर्वाद से भूमि कब्जा करने, लोगों को डराने – धमकाने, सस्ते में भूमि खरीदने, पुलिस – प्रशासन का दवाब डालवा कर लोगों की भूमि कब्जाने में संलिप्त रहते हैं।

Congressi Banti Babli Sachin Upadhyay Nazia Yusuf
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ऐसा ही एक केस, जो राष्ट्रीय मीडिया पटल से दूर एक छोटे से राज्य उत्तराखंड से आया है। ये कहानी बड़ी दिलचस्प है, इसमें कई मोड़ है और यह बताती हैं कि कैसे एक राजनैतिक परिवार से जुड़ा शख्स एक छोटे से अपराध से शुरू होकर एक बड़ा अपराध को अंजाम देता है और शासन – प्रशासन आंखे मूंद कर बैठ जाता है।

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अप्रैल 2011 में सचिन उपाध्याय पर अरोप लगा कि उन्होंने एमडीडीए के उन तीन कर्मचारियों को अपने भवन में बंधक बना लिया था, जो सचिन की अवैध इमारत को सील करने आए थे, बाद में पुलिस द्वारा कड़ी मशक्कत के उनको छुड़ाया गया। शायद आपको इस बात पर यकीन ना हो, इसलिए हम आपको सचिन उपाध्याय के ऐसे कारनामों के बताने के बारे में बता रहे हैं, जिसे जानने के बाद आप बंटी – बबली के कारनामों को भूल जाएंगे। यह मामला तीन कंपनियों से जुड़ा हुआ है।

1. एस एम हॉस्पलिटी प्राइवेट लिमिटेड़।

2. एस एंड एन लाइफस्टाइल इन्फ्रवेंचर प्राइवेट लिमिटेड़।

3. एस एंड एन लाइफस्टाइल प्राइवेट लिमिटेड़।

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एस. एम. हॉस्पलिटी की स्थापना 31- 2 – 2006 को मुकेश जोशी और सचिन उपाध्याय द्वारा की गई। इस कंपनी में दोनों बराबर के शेयरहोल्डर थे। इस कंपनी का उद्देश्य होटल का निर्माण करना था, जिसके लिए दोनों शेयरहोल्डरों को समान निवेश करना था। मुकेश जोशी ने अपने हिस्से के एक करोड़ 70 लाख रुपए जमीन खरीदने के लिए डाल दिए लेकिन सचिन उपाध्याय की तरफ से कोई निवेश नहीं आया और वह पैसे देने के लिए बहाना बनाता रहा। पैसे ना देने के कारण दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा। 2010 में मानसिक प्रताड़ना, सचिन उपाध्याय के भाई किशोर उपाध्याय के दवाब के कारण और अपनी खून – पसीने से कमाए पैसे को लुटता देखकर मुकेश जोशी को हार्ट अटैक आया और वह कई दिनों के लिए बेड़ रेस्ट पर रहें।

Congressi Banti Babli Sachin Upadhyay Nazia Yusuf
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इस बात का लाभ लेकर सचिन उपाध्याय ने अपने भाई के राजनैतिक कद और कांग्रेस की सत्ता का फायदा उठाकर मुकेश जोशी के फर्जी हस्ताक्षर करके उनका त्याग पत्र रजिस्टार ऑफ कंपनिज में जमा करा दिया और उनकी जगह अपनी पत्नी नाज़िया यूसुफ इज़ुद्दीन को स्वत: ही कंपनी का नया डायरेक्टर नियुक्त कर दिया। जब मुकेश जोशी को इस धोखाधड़ी का पता चला कि जिस कंपनी में वो 50 प्रतिशत के पार्टनर थे और जिसमें उन्होंने अपने जीवन की कमाई एक करोड़ 70 लाख लगाए थे, वो उनके हाथ से निकल गई और धोखाधड़ी कर उन्हें अपनी ही कंपनी से निकाल दिया गया है तो उन्होंने 2012 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में उपाध्याय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

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इसके साथ ही उन्होंने कंपनी के मामलों को देखने वाले कोर्ट, कंपनी लॉ बोर्ड (वर्तमान में एनसीएलटी) में केस दर्ज कराया। एनसीएलटी ने प्रथम दृष्ट्या इसे अवैध करार देते हुए मुकेश जोशी के पक्ष में यह आदेश दिया कि यदि मान लिया जाए कि मुकेश जोशी का त्यागपत्र ओरिजनल भी है, बावजूद इसके यह कहीं से साबित नहीं होता कि उन्होंने अपने हिस्से के 50 प्रतिशत शेयर होल्डिंग दी है। इसलिए उनकी शेयरहोल्डिंग उन्हें वापस दी जाए और मुकदमा चलता रहेगा।

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पैसे वापस ना देने की स्थिति में सचिन उपाध्याय और नाजिया ने मुकेश जोशी के साथ एक और इकरारनामा किया। उस इकरारनामे के तहत ये तय हुआ कि जब तक वो मुकेश जोशी के पैसे वापस नहीं देते, तब तक सचिन उपाध्याय के 50 प्रतिशत शेयर भी मुकेश जोशी के नाम पर गिरवी रहेंगे, साथ ही यदि तीन महीने तक उपाध्याय पैसे ना दे पाएं तो सारे शेयर मुकेश जोशी के हो जायेंगे।

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इसके अलावा दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने विवेचना कर 420, 406, 467, 468, 471 और 120 जैसी जघन्य अपराध धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और नामजद किया इसमें सचिन उपाध्याय, उनकी पत्नी नाजिया, उनके चार्टेट अकांउटेड और कंपनी सेक्रेटरी को। जैसे ही सचिन उपाध्याय और नाजिया को ये ज्ञात हुआ कि आर्थिक अपराध शाखा ने मुकदमा दायर कर लिया है, वैसे ही दोनों ने मुकेश जोशी से समझौता करके उसे कंपनी लॉ बोर्ड से डिक्ररी करा लिया। उस समझौता में सचिन उपाध्याय ने स्वयं स्वीकार किया कि मुकेश जोशी कंपनी के 50 प्रतिशत शेयर दो करोड़ 65 लाख के एवज में वापस करेंगे। किन्तु यहां से सचिन के अपराध का दूसरा चरण शुरू होता है। ये लोग दो साल तक टालमोटाई करते रहें और जोशी का कोई भी पैसा वापस नहीं किया।

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दूसरा कारनामा – पंजाब नेशनल बैंक को चूना लगाया

पहले कारनामे से तो आप समझ ही गए होंगे कि जो भूमि एस. एम हॉस्पलिटी ने खरीदी है, वह विवादित है और यह मामला कोर्ट में था। कोर्ट ने कुछ आदेश किए लेकिन सचिन उपाध्याय और नाजिया ने उन आदेशों की अवहेलना की। कोर्ट के आदेशानुसार कंपनी के सारे शेयर मुकेश जोशी के हैं पास हैं, इस लिहाज से सचिन उपाध्याय और नाजिया को कोई अधिकार नहीं बनता कि वह इस भूमि की बेच सकें या कंपनी में खुर्द – बुर्द कर सकें। किन्तु बंटी – बबली फिल्म से प्रेरित ये मियां- बीवी कहां कोर्ट के आदेश मानने वाले थे। उन्होंने कोर्ट के आदेशों को धत्ता बताते हुए जोशी के पैसे तो वापस नहीं किए, उल्टा विवादित एस. एम. हॉस्पलिटी से अपना नजायज क्लब के लिए पंजाब नेशनल बैंक से 39 करोड़ और अन्य वित्तीय संस्थानों से 5.2 करोड़ का लोन लिया।

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जबकि ये क्लब एमडीडीए के रिकॉर्ड में सील्ड़ है। सचिन उपाध्याय ने पंजाब नेशनल बैंक से ये सब आदेश और करारनामा छुपाकर लोन लिया। इस लोन को लेने और देने दोनों प्रक्रिया में किसी बड़े घोटाले की बू आ रही है। इसमें बैंक आधिकारियों की मिलीभगत ना हो, ऐसा संभव ही ना है। जिस इमारत को एमडीडीए ने सील कर रखा है, जिस पर कोई नक्शा पास नहीं है। जिस पर एक अर्धनिर्मित भवन खड़ा है। उस पर बैंक बिना नक्शों को देखें हुए, कपंनी के इतिहास को देखते हुए इतना बड़ा लोन कैसे दिया? ये अपने आप में ही बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है।

तीसरा कारनामा – 1300 लोगों के साथ धोखाधड़ी

इन दो कारनामों के बाद भी सचिन उपाध्याय और नाजिया रूके नहीं। मुकेश जोशी और पंजाब नेशनल बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के बाद इन्होंने 1300 लोगों को भी धोखा दिया है। इस विवादित जमीन पर दोनों पति – पत्नी 2006 से WIC नाम का क्लब चला रहे हैं। इस क्लब की जमीन का एक हिस्सा लीज पर लिया गया है जबकि दूसरा हिस्सा विवादित है। इस क्लब ने 2006 में 1300 लोगों को दो लाख से लेकर पांच लाख रुपए में लाइफटाइम मेंबरशिप दी थी। लेकिन सच ये हैं कि क्लब की यह जमीन सिर्फ 2020 तक ही लीज पर मिली है और इसके बाद लीज को आगे बढ़ाने की संभावना भी कम हैं।

ऐसे में उन 1300 लोगों के साथ सीधे – सीधे धोखाधड़ी हैं, जिन्होंने लाखों रुपए में इस क्लब की मेंबरशिप ले रखी हैं, क्योंकि जब लीज ही 10 साल की मिली है, तो कोई भी कंपनी अपने उपभोक्ताओं से लाइफटाइम का वादा कैसे कर सकती है। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के मुताबिक WIC को क्लब के रुप में मसूरी – देहरादून प्राधिकरण से स्वीकृति नहीं मिली है। एमडीडीए ने इसके पूर्व मालिक सुभाष चंद्र वर्मा को अवासाई ईकाई के लिए मंजूरी दी थी। लेकिन अब इस जमीन पर पूरा क्लब संचालित है। जिसमें होटल, रेस्तरां, बार आदि खूब फल – फूल रहे हैं। साथ ही एमडीडीए के नियमों को ताक पर रखकर इसमें अवैध निर्माण कराया गया है।

Congressi Banti Babli Sachin Upadhyay Nazia Yusuf : इस क्लब को उत्तराखंड अग्निशमन विभाग से भी एनओसी नहीं मिली है। हालांकि 2011 में एमडीडीए ने इस क्लब को अवैध ठहराते हुए सील कर दिया था, लेकिन 2012 में फिर से कांग्रेस की सरकार आने के बाद इसे खोल दिया गया। सचिन उपाध्याय ने पहले अपने पार्टनर के साथ धोखाधड़ी की फिर पंजाब नेशनल बैंक को अंधेरा में रखा और अब उन 1300 लोगों के साथ भी धोखा कर रहे हैं, जिन्होंने WIC क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप ले रखी है। हैरानी की बात हैं कि कोर्ट के आदेश के बाद भी और इतनी बड़ी धोखाधड़ी के बाद भी सतिन उपाध्याय का बाल बांका नहीं हुआ है। आश्चर्य़ होता है कि जो पंजाब नेशनल बैंक गले – गले तक घोटाले में दबा हुआ है, जिसके आगे तमाम शिकायतों के अंबार लगे हैं, उसने इतनी आसानी से, बिना कुछ जांच – पड़ताल किए इतना बड़ा लोन उपाध्याय को दे दिया।

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Congressi Banti Babli Sachin Upadhyay Nazia Yusuf : आम आदमी को तो एक कार के लोन तक के लिए एडियां घिसनी पड़ती हैं और सत्ता से जुड़े लोगों को बैंक आंखे बंद कर लोन दे रहा है। इतना ही नहीं अभी तक पंजाब नेशनल बैंक ने ना तो सचिन उपाध्याय पर कोई मुकदमा किया और ना ही लोन वापसी के लिए कोई दवाब बनाया है। अगर आपको लगता है कि ये पैसा सरकार का है तो आप गलत सोच रहे हैं। ये लोन का पैसा जनता की मेहनत का पैसा होता है। जब आम आदमी अपने खून – पसीने की कमाई का एक हिस्सा टैक्स के रुप में भरता है, तब जाकर इन रसूखदार लोगों को भारी – भरकम लोन मिल पाता है। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से देश में ऐसे लोगों की गिनती बढ़ती जा रही है, जो बैंक को चूना लगाकर विदेश भाग गए हैं।

कमाल की बात ये हैं कि हमारे देश के बैंकों ने विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे भगोड़े लोगों से भी कुछ सीख नहीं ली। जो बैंक का पैसा लेकर फरार हो गए। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब सचिन उपाध्याय जैसे लोग बैंकों का सारा पैसा लेकर रफूचक्कर हो जाएंगे। अभी ये क्रम यहां खत्म नहीं हुआ। कांग्रेसी नेता के भाई के कारनामें यहीं तक थमें नहीं है। अभी आगे भी बहुत खुलासे होने बाकी हैं तो इंतजार कीजिए भाई – भतीजावाद की राजनीती की सारी हदें तोड़ने वाली हमारी अगली विस्फोटक स्टोरी का…

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