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वारिस अली की बेगम और बेटी+बेगम दोनों पहुंची कोर्ट, जज का भी घूम गया है माथा, करे तो क्या करे

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Muslim man married Daughter
Muslim man married Daughter

Muslim man married Daughter : आप इस खबर को ध्यान से पढियेगा क्यूंकि हम जानते है की शायद आप कन्फुज हो सकते है, हमें भी जब ये जानकारी मिली तो हमे इसे पूरा समझने में 20 मिनट लग गया 

एक मुस्लिम शख्स ने अपनी बेटी से भी निकाह कर लिया, यानि उसकी बेटी जो अबतक बेटी थी वो बेटी के साथ साथ बेगम भी हो गयी, साथ ही उस बेटी की माँ भी इस शख्स की बेगम है, यानि माँ बेटी दोनों से ही एक शख्स ने निकाह कर लिया, और मामला कोर्ट पहुँच गया, चूँकि दोनों ही महिलाएं एक तो उसकी बेगम और एक बेटी+बेगम इस शख्स को शौहर के रूप में ही पाना चाहती है, जज भी परेशान है की क्या निर्णय करे


शेरबानो काज़मी नाम की एक मुस्लिम महिला कोर्ट पहुंची है, हुआ ये की शेरबानो काज़मी की उम्र 40 साल है उसके शौहर का देहांत हो गया तो उसने अपने ही घर में काम करने वाले वारिस अली शाह से निकाह कर लिया, वारिस अली शाह उसका कर्मचारी था, शौहर के देहांत के बाद शेरबानो काज़मी ने वारिस अली शाह से निकाह किया

वारिस अली शाह की उम्र 28 साल है, अब इस शेरबानो काज़मी की एक बेटी है जिसका नाम है शुमैरा, जो की 21 साल की है, जब शेरबानो काज़मी ने वारिस अली से निकाह किया तो सबकुछ ठीक चल रहा था, वारिस शेरबानो काज़मी के ही घर रहने लगा, कई महीनो तक सब ठीक चला और शुमैरा ने वारिस अली को अब्बू भी बोलना शुरू कर दिया

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पर वारिस अली की नियत अब्बू बोल रही शुमैरा पर आ गयी तो उसने शुमैरा को किसी तरह प्यार के जाल में फंसा लिया और वारिस अली ने शेरबानो काज़मी को बिना बताये शुमैरा से निकाह कर लिया, यानि वो माँ का भी शौहर हो गया और अब्बू बोलने वाली शुमैरा का भी शौहर हो गया

Muslim man married Daughter : शेरबानो काज़मी को जब ये पता चला तो उसने कोर्ट में वारिस अली और शुमैरा के निकाह को रद्द करने की अर्जी डाली, अब इसकी सुनवाई चल रही है, शेरबानो काज़मी का कहना है की वारिस अली ने उसे धोखा दिया है, उसने उस से निकाह किया तो उसे बताया था की उसकी एक बेटी भी है तो वारिस अली ने अल्लाह का वास्ता दिया की शेरबानो काज़मी की बेटी को अपनी बेटी की तरह ही प्यार करेगा

पर वारिस अली ने शुमैरा को फंसाकर निकाह कर लिया, अब जज ने शुमैरा से पुछा की वो क्या चाहती है तो शुमैरा भी अब वारिस अली को शौहर की तरह ही चाहती है, यानि पेंच फंस गया है, वारिस अली माँ का भी शौहर हो गया है और बेटी का भी, और वो दोनों में से किसी को तलाक नहीं देना चाहता, और साथ ही दोनों महिलाएं भी उसे तलाक नहीं देना चाहती, वारिस अली दोनों को बेगम के तौर पर रखना चाहता है

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Muslim man married Daughter : इसका कारण ये है की शुमैरा उसे पसंद है चूँकि वो जवान है, वहीँ शेरबानो के नाम पर सारी प्रॉपर्टी है, तो वारिस अली दोनों को बेगम बनाकर रखना चाहता है, अब शेरबानो अपनी ही सगी बेटी को अपनी सौतन के रूप में नहीं देखना चाहती इसलिए वो वारिस अली और शुमैरा के निकाह को रद्द करने की मांग कर रही है, पर शुमैरा भी वारिस अली के प्यार में है और बालिग भी है

मामला पाकिस्तान के खैबर पख्तुन्वा के हजारा जिले के हरिपुर का है और ये मामला अब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है, इस मामले को सुनने के लिए स्पेशल बेंच बनाई गयी है जिसमे गुलज़ार अहमद मुख्य जज है, मामला पेचीदा है इसलिए बेंच बनाई गयी है और अब सुनवाई चल रही है की इस मामले में फैसला क्या दिया जाये

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