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पटेल का निधन हुआ, नेहरु ने राष्ट्रपति को कहा – पटेल के अंतिम संस्कार में मत जाओ, गए तो नेहरु ने राष्ट्रपति का भी शुरू कर दिया बायकाट

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Nehru hates Patel
Nehru hates Patel

Nehru hates Patel : नेहरू को सरदार पटेल से कितनी नफरत थी, ये ठीक से कहा भी नहीं जा सकता, नेहरू किसी से भी उतनी नफरत नहीं करता था जितनी सरदार पटेल से करता था, और इसके कई कारण थे 

नेहरू हमेशा से मोहनदास गाँधी का चमचा बनकर चलता था, जबकि सरदार पटेल कांग्रेस के सभी नेताओं से अच्छे सम्बन्ध रखते थे, जब देश के प्रधानमंत्री को चुनने की बारी आयी तो नेहरू पहले से आस्वस्त था की मैं ही देश का प्रधानमंत्री बनूँगा, पर कांग्रेस के नेताओं ने पटेल को वोट दे दिया, पर नेहरू की चाटुकारिता काम आयी और मोहनदास गाँधी ने लोकतंत्र की हत्या करते हुए नेहरू को भारत का प्रधानमंत्री बनवा दिया


नेहरू पटेल को अपने मंत्रिमंडल में भी जगह नहीं देना चाहता था, पर कांग्रेस के नेता विद्रोह पर न उतर जाये, गाँधी के कहने पर नेहरू पटेल को गृहमंत्री पद देने के लिए मान गया, और पटेल गृहमंत्री बने, और अपना काम करने लगे

आज़ादी के बाद भी नेहरू भारत में कई इस्लामिक इलाके चाहता था, इसी कारण उसने भारतीय सेना को समय पर कश्मीर नहीं भेजा और आधे कश्मीर पर पाकिस्तान को कब्ज़ा करने दिया, जिसे आज हम POK के नाम से जानते है, इसके अलावा भी नेहरू अवध, हैदराबाद, गुजरात और कई इलाकों में मुस्लिम शासक चाहता था, पर सरदार पटेल नहीं माने और उन्होंने हैदराबाद के निजाम को ख़त्म किया और अन्य मुस्लिम इलाके भी भारत में सम्मिलित करवाए, नेहरू को सरदार पटेल से बहुत ज्यादा घृणा थी और इस बात का आपको अब प्रमाण भी मिलेगा

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सरदार पटेल का देहांत 15 दिसंबर 1950 को बॉम्बे में 75 साल की उम्र में निधन हो गया, उस समय वो सिटींग गृहमंत्री थे, वो देश के गृहमंत्री थे, नेहरू ने अपने गृहमंत्री के अंतिम संस्कार में जाने से इंकार कर दिया, और वो पटेल के अंतिम संस्कार में नहीं गया, इतना ही नहीं उसकी नफरत का ये आलम था की उसने तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को भी पटेल के अंतिम संस्कार में ना जाने को कहा, पर राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्रधानमंत्री नेहरू की बात नहीं मानी और वो देश के गृहमंत्री पटेल के अंतिम संस्कार में शामिल हुए

Nehru hates Patel : पटेल से नफरत के बाद नेहरू के नफरत के निशाने पर राजेंद्र प्रसाद आ गए, क्यूंकि वो सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में नेहरू की इक्षा के विरुद्ध गए थे, इसके बाद मई 1962 तक राजेंद्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति रहे, मई 1962 में वो रिटायर हो गए, और देश के नए राष्ट्रपति बने सर्वपल्ली राधाकृष्णन

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फ़रवरी 1963 में पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का देहांत हो गया, देश में नेहरू उस समय भी प्रधानमंत्री था, और देश के राष्ट्रपति राधाकृष्णन थे, नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद के अंतिम संस्कार में भी जाने से इंकार कर दिया, और इतना ही नहीं राधाकृष्णन को भी नेहरू ने पूर्व राष्ट्रपति के अंतिम संस्कार में जाने से मना किया, कहा की उसके अंतिम संस्कार में मत जाओ

पर राधाकृष्णन ने नेहरू की बात को नहीं माना और वो देश के पूर्व राष्ट्रपति के अंतिम संस्कार में शामिल हुए, उसके बाद नेहरू के नफरत के निशाने पर राधाकृष्णन  आ गए, पर नेहरू खुद 1964 में मर गया, ऐसा था देश का पहला प्रधानमंत्री जिसका बखान करते थकती नहीं है कांग्रेस

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