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भारतीय न्याय व्यवस्था – हर तीसरा जज किसी दुसरे जज का रिश्तेदार, कुछ परिवार चला रहे न्याय व्यवस्था

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Reality of Indian Judiciary
Reality of Indian Judiciary

Reality of Indian Judiciary : भारतीय न्याय व्यवस्था एक ऐसा सिस्टम है जो भारत में अदालतों को चला रहा है, इसे लोकतंत्र का एक स्तम्भ भी कहते है, पर इस न्याय व्यवस्था में कोई लोकतंत्र नहीं है 

भारत में हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जज एक खास सिस्टम से बनते है जिसे कोलोजियम सिस्टम कहते है, इस सिस्टम के तहत जज खुद ही दुसरे जजों को नियुक्त करते है, और इसमें इतना भयानक परिवारवाद है की मत पूछिए


लगभग हर जज का या तो परिवार पहले से न्याय व्यवस्था में रहा है या फिर राजनिति में रहा है, वर्तमान CJI रंजन गोगोई के पिता कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे, इस से पहले के CJI दीपक मिश्र के पिता रंगनाथ मिश्रा भी CJI थे, सिर्फ राजनीती में ही नहीं बल्कि अदालतों में भी जज के पेट से जज निकलते है

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भारत में न्याय व्यवस्था कुछ परिवार ही चला रहे है, जज अपने परिवार वालो को न्याय व्यवस्था में सेट करते है, और ये एक कड़वा सच है, और जज इस कोलोजियम सिस्टम पर सवाल उठाने वालो को भी नोच खाने के लिए तैयार रहते है

Reality of Indian Judiciary
Reality of Indian Judiciary

सुप्रीम कोर्ट के जजों का वेतन- 2,50,000/  साथ ही दुनिया भर के भत्ते, नौकर चाकर, सुख सुविधा और हर जगह वरीयता अल से, साल में औसतन 150 दिन का अवकाश, और अयोध्या मसले जैसे अहम् मसले सुनने के लिए 3 मिनट

सुप्रीम कोर्ट के पास अयोध्या मसला 2010 से ही है यानि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में 8 साल हो गए है, और अदालत इस मामले को लेकर कितनी गंभीर है वो 3 मिनट की सुनवाई से पता भी चलता है

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इस देश में ब्याय व्यवस्था कुछ परिवारों की जागीर बनी हुई है, और अब एक आन्दोलन इस कोलोजियम सिस्टम को बदलने की जरुरत है, देश में लोकतंत्र चल रहा है तो देश की किसी संस्था में परिवारवाद कैसे चल सकता है, जज देश के फैसले करते है, तो इनका चुनाव और नियुक्ति भी लोकतान्त्रिक तरीके से होनी चाहिए

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