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पटेल जयंती पर नमन है सरदार पटेल को, वो न होते तो हैदराबाद आज होता इस्लामिक मुल्क

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Sardar Patel anniversary
Sardar Patel anniversary

Sardar Patel anniversary : आज सरदार पटेल जयंती है, आज ही के दिन यानि 31 अक्टूबर को 1875 में भारत पुत्र सरदार पटेल का जन्म हुआ था, वो हमेशा से ही साधारण व्यक्ति पर असाधारण व्यक्तित्व रहे थे, आखिरी समय में वो भारत के गृहमंत्री थे, पर उनकी मौत के बाद उनकी बेटी मणिबेन एक चश्मे के लिए तरस गयी थीं 

जहाँ नेहरू गाँधी के संतानें बंगले में थी, सरदार पटेल ऐसे थे की उनकी बेटी 1 चश्मे के लिए भी तरस गयी थी, उनके पास 30 साल पुराना चश्मा था जिस से ठीक से दिखाई भी नहीं देता था, कांग्रेस के नेताओं ने मणिबेन को 1 चश्मा भी नहीं उपलब्ध कराया, खैर


आज पटेल जयंती के दिन हमे सरदार पटेल को सिर्फ हैप्पी बर्थडे बोलकर काम नहीं चलाना चाहिए, बल्कि उनके किये हुए कामो को याद करना चाहिए, भारत आज़ाद हो गया था पर फिर भी भारत में कई सारी रियासतें थी, राजा, महाराजा, निजाम थे

हिन्दू राजाओं ने तो भारत में समिल्लित होना आसानी से स्वीकार कर लिया, पर मुस्लिम निजामों ने ऐसा नहीं किया, और उन्होंने कत्लेआम शुरू कर दिया, नेहरू ने तो भारत में कई मुस्लिम देश बनाने का पूरा प्रयास किया, आधे कश्मीर पर नेहरू ने पाकिस्तान को कब्ज़ा करने दिया, भारतीय सेना तब भेजी गयी जब आधे कश्मीर पर पाकिस्तान ने कब्ज़ा कर लिया

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Sardar Patel anniversary : नेहरू हैदराबाद को भी जो आज तेलंगाना की राजधानी है, उस हैदराबाद और उस से सटे कुछ जिलों को हैदराबाद रियासत कहा जाता था, जहाँ पर इस्लामिक स्टेट थे, वहां निजाम राज कर रहा था, निजाम ने भारत में सम्मिलित होने से इंकार कर दिया, बल्कि वो पूर्वी पाकिस्तान यानि बांग्लादेश की तरह हैदराबाद को भी पाकिस्तान बनाना चाहता था, वो चाहता था की हैदराबाद भी पाकिस्तान देश का हिस्सा बन जाये, 3 पाकिस्तान हो जाये, एक पश्चिमी पाकिस्तान, एक पूर्वी पाकिस्तान, और हैदराबाद हो जाये दक्षिणी पाकिस्तान

भारत ने निजाम की मांग को स्वीकार नहीं किया, तो निजाम ने हैदराबाद में हिन्दुओ का कत्लेआम शुरू कर दिया, कुल ढाई लाख हिन्दुओ का कत्लेआम निजाम की सेना ने किया, यहाँ नेहरू भारतीय सेना को हैदराबाद कूच करने से रोकता रहा, और गाँधी भी उसका साथ देता रहा, पर आख़िरकार पटेल ने हस्तक्षेप किया, और उन्होंने नेहरू की कोई बात नहीं सुनी और भारतीय सेना को हैदराबाद में कूच करवा दिया, और उसके बाद हैदराबाद भारत में शामिल हुआ, और आज भारत का इलाका है, जहाँ हम और आप बिना वीजा अपनी मर्जी से आ जा सकते है

Sardar Patel anniversary : अगर पटेल नहीं होते तो 1 तो पश्चिम में पाकिस्तान है, पूर्वी पाकिस्तान अब इस्लामिक बांग्लादेश है, हैदराबाद भी एक इस्लामिक देश होता, और वहां भी हिन्दुओ का वही हाल होता जो बांग्लादेश और पाकिस्तान में है, गाँधी के कारण सरदार पटेल इस देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाए, अगर पटेल प्रधानमंत्री होते तो न होती कश्मीर समस्या और न होता भारत में इस्लामिक जिहाद, न चीन भारत से पहले परमाणु शक्ति बना होता, न होती हमारी 1962 के युद्ध में हार, न ही चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में होता, वहां हम होते

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पटेल जयंती पर न केवल हमे महान सरदार पटेल को याद करना है, बल्कि गाँधी और नेहरू की ग़द्दारियों को भी नहीं भूलना है, उनके ही कारण हमारे देश में पटेल नहीं बल्कि नेहरू प्रधानमंत्री बना, और देश को अभिशाप मिले, पटेल जयंती पर हमे गद्दारों के खिलाफ एकजुट होने का संकल्प लेना चाहिए, जो पटेल द्वारा संयुक्त किये गए इस भारत के टुकड़े टुकड़े करना चाहते है और भारत तेरे टुकड़े होने इंशाल्लाह का नारा लगाते है, सिर्फ सरदार पटेल को हैप्पी बर्थडे बोलने से काम नहीं चलेगा, हमे संकल्प लेना होगा और गद्दारों के खिलाफ संगर्ष करना होगा

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