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किसान आन्दोलन की खुल रही पोल – 70% कथित किसानो को खुद की डिमांड भी नहीं पता

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Truth of Farmers Protest
Truth of Farmers Protest

Truth of Farmers Protest : दैनिक भारत के पाठकों को हम पहले भी कई बार बता चुके है की किसी आन्दोलन को समझने का सबसे आसान तरीका क्या है, हम आपको फिर बता रहे है 

जब भी कोई आन्दोलन हो और उसके बारे में मीडिया आपको कुछ बता रही हो, तो आपको सबसे पहले देखना चाहिए की उस आन्दोलन से वामपंथी जुड़े है या नहीं, वामपंथी उस आन्दोलन के समर्थन में है या नहीं, और ये काम आसान है, आब देश के प्रमुख वामपंथियों के सोशल मीडिया अकाउंट पर जाकर देख सकते है


जिस भी आन्दोलन से वामपंथी जुड़े हुए हो या वामपंथी उसका समर्थन कर रहे हो, तुरंत भांप जायें की आन्दोलन के बारे में मीडिया जो आपको बता रही है कहानी बिलकुल उस से उलट है

दिल्ली के बॉर्डर पर किसान और उनपर अत्याचार, ये मीडिया ने आपको बताया, कुछ लोग ये भी बता रहे है की गोलियां भी चल गयी, और कविता कृष्णन जैसे वामपंथी तो 2013 की फोटो को 2018 में शेयर कर रहे है, वो भी आपको दिखायेंगे

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पहले देखिये आन्दोलन करने सड़कों पर निकले कथित किसानो को खुद की डिमांड पता भी है या नहीं, आखिर किस मांग को लेकर ये सड़क पर घर छोड़कर आये है ये भी इनको पता है या नहीं

70% कथित किसान तो ऐसे निकले है जिनको ये भी नहीं पता की किस मांग को लेकर वो आन्दोलन करने पहुंचे है, असल में ये किसान नहीं है ये भाड़े के लोग है जो इस आन्दोलन में किसान बनाकर लाये गए है, दलित आन्दोलन हो तो दलित भी ये ही बनते है, ये लोग हर आन्दोलन में अलग अलग ड्रेस पहनकर फिट हो जाते है

आप खुद सोचिये की 70% तो ऐसे है जो अपने घर से निकलकर आ गए है पर इनको मांग तक पता नहीं, क्या ये किसान है, अब आपको कुछ और दिखाते है

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Truth of Farmers Protest
Truth of Farmers Protest

वामपंथी कविता कृष्णन बता रही है की मोदी सरकार किसानो पर बन्दुक तान रही है, किसानो को गोली मारी जा रही है, कविता कृष्णन ने तस्वीर भी डाली है, जो आप ऊपर देख सकते है, अब इस तस्वीर की सच्चाई देखिये

Truth of Farmers Protest
Truth of Farmers Protest

ये 2013 में मेरठ में खाप आन्दोलन की तस्वीर है, और ये जो पुलिस कर्मी है वो मेरठ का है और उस समय अखिलेश सरकार थी, अब 2013 की तस्वीर को कविता कृष्णन जैसे वामपंथी 2018 में योगी और मोदी को बदनाम करने के लिए शेयर कर रहे है

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पूरा आन्दोलन राजनितिक है, 70% तो किराये के लोग है, बाकि जितने है वो सभी राजनितिक कार्यकर्त्ता है, RLD का भी लिंक जुड़ा हुआ है, इनमे किसान 1 भी नहीं है, किसान अपने घर और खेतों में काम कर रहा है, और विपक्ष किसानो के नाम पर देश में फर्जी आन्दोलन कर रहा है ताकि सत्ता में आ सके !

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