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मुसलमानों, ईसाईयों और भीमटों के बीच दलितों का ही हुआ है सबसे ज्यादा शिकार, पीड़ित दलित ही है

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Asia bibi is a dalit
Asia bibi is a dalit

Asia bibi is a dalit : क्या आप एक तरबूज एक ही बार में खा सकते हैं ??? जवाब साफ़ है,. नहीं !! फिर क्या तरीका है ?? वही जो अंग्रेजों के साथ आयी ईसाई मिशनरियों ने किया। पहले हिन्दुओं की आर्थिक ताकत को तोडा, उनको कंगाल बनाया,. और जो skilled Class था, जो उद्यमी और कमाऊ वर्ग था, ..जो विश्व की 35% GDP का उत्पादन करता था.

उनको बर्बाद कर के दलित और पिछड़ा घोषित किया,..फिर उनकी बदहाली का इलज़ाम लगाया ब्राह्मणो और वर्ण व्यवस्था पर,.फिर इन्ही जातियों को बरगला कर ईसाई बनाया…


बताया तो ऐसा था की ईसाई बनते ही सारे “प्रिंस ऑफ़ वेल्स” जैसी शानदार जिंदगी जियेंगे, लेकिन ऐसा हुआ बिलकुल भी नहीं,. धर्म बदलने के बाद भी ये दलित समुदाय “दलित” ही रहा,….

अब बात करते हैं अफगानिस्तान और पाकिस्तांन की… ये क्षेत्र भारत का हिस्सा था,.. अब नहीं है,. क्यू की यहाँ इस्लामीकरण हो गया,. सब लोग मुसलमान बन गए या बना दिए गए,..और उन्होंने धार्मिक आधार पर अलग देश बना लिया,..

लेकिन ज़रा ठहरिये ज़नाब !!!

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क्या आपने कभी सोचा है की इन क्षेत्रों में जिन लोगों को मुसलमान बनाया गया वो किस धर्म के थे ??? हिन्दू ???? ……… जी नहीं !!!!!,…..

अफगानिस्तान और पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा पहले ही हिन्दू धर्म त्याग कर “बौद्ध” बन चुका था,.. यानि तथा कथित “वर्ण -विहीन” समाज बन चूका था.

गौर कीजियेगा की भारत का बाहरी हिस्सा जो हिन्दू धर्म से अलग होकर पहले बौद्ध बन चुका था वो आसानी से इस्लामी आक्रमण का निवाला बन गया. लेकिन जो हिन्दू सामाज सनातन-व्यवस्था पर अडिग रहा,. वो गुलामी के हज़ार साल तक संघर्ष करता रहा,.. और अपना अस्तित्व बचाने में सफल हुआ. देश के जिस हिस्से में वर्ण व्यवस्था कटटरता से लागू थी,. वहां ईसाईकरण और इस्लामी करण भी नहीं हो पाया था…..

अब जिन हिस्सों का इस्लामीकरण नहीं हो पाया था, धूर्त ईसाई मिशनरियों ने उन जगहों को निशाना बनाया,.. नतीजा ये हुआ की आज भारत का अधिकाँश उत्तर पूर्व हिस्सा ईसाई बन चूका है,.. और इतना ही नहीं, .. 80 के दशक में इन्होने अलग ईसाई देश की मांग भी शुरू कर दी,..

1947 में देश का बंटवारा हुआ तो दलितों का बहुत बड़ा तबका जोगेंद्र नाथ मंडल की अगुआई में पाकिस्तान के समर्थन में था,.. पाकिस्तान बनने के बाद जोगेंद्र नाथ मंडल का क्या हाल हुआ वो आप गूगल और विकिपीडिया पर खुद पढ़ लें,..

26 प्रतिशत पाकिस्तानी हिन्दुओं में से 16 प्रतिशत दलित समुदाय था,.. आज वो दलित समुदाय वहां किस हालत में है, उसकी तस्वीर आप नीचे देख सकते हैं ,. ये आसिया बीवी है,.. बाल्मीकि समुदाय से है,.. ईसाई धर्म अपना चुकी है

Asia bibi is a dalit
Asia bibi is a dalit

इसने एक मुसलमान महिला के गिलास से पानी पी लिया था,.. उसने आसिया को गाली दे दी,. आसिया ने भी जवाब दे दिया, बस “शांतिप्रिय समुदाय” की भावना आहत हो गयी, और आसिया के ऊपर पैगंबर की शान में गुस्ताखी का इलज़ाम लगा दिया,

अब वो दस साल से कैद में थी,.. परन्तु इसी सप्ताह सबूतों के अभाव में कोर्ट ने उसे बरी कर दिया,.. अब पाकिस्तान के शांतिदूत आसिया के साथ साथ जज , वकील, फ़ौज और इमरान खान की जान के पीछे पड़ गए हैं,..

तो धर्मांतरित हिंदुओं के पूर्वजों ने किस लालच या भय से धर्म परिवर्तन स्वीकार किया ?? क्या वो पहले से ज्यादा सुरक्षित हो गए ?? ज्यादा सम्पन्न हो गए ?? ज्यादा प्रतिष्ठित हो गए ??

पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश की हालत देख लीजिये,.. और वहां बसने वाले हिन्दू / दलितों की हालत देख लीजिये, अब आप अंदाजा लगाइये की अपने देश में जो जय भीम के नाम पर धर्मांतरण का खेल हो रहा है उसका भविष्य क्या है ??

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ये एक बड़े खरबूजे को काटने जैसा है,.. छोटे छोटे टुकड़े कर के खाने जैसा है,..अंग्रेज देश छोड़ कर गए तो देश 700 टुकड़ों में बंटा था,..और जाते समय उन्होंने यही सोचा की वापस आकर फिर से इन टुकड़ों को खाया जायेगा,.. लेकिन सरदार पटेल ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया,.

सरदार पटेल की मूर्ती से इन सबको इसीलिए एलर्जी हो रही है,..वेटिकन चर्च और देसी विदेशी मीडिया फिर से “टुकड़े -टुकड़े” गैंग को खड़ा कर के पुराने समय को लौटाना चाहता है,

और उनका साथ अरबी खजूर पर पलने वाले कनखजूरे भी दे रहे हैं,..क्यों की कद्दू कटेगा और सब में बंटेगा,..

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