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ब्रह्मचारी भगवान् दत्तात्रेय के बारे में जान लीजिये, कहीं राहुल गाँधी व वामी बुद्धिजीवी आपको न बना दे मुर्ख

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Bhagwan Dattatreya
Bhagwan Dattatreya

Bhagwan Dattatreya : कल राहुल खान गांधी ने अपना “गोत्र दत्तात्रेय” बताते हुए खुद को जनेऊधारी हिन्दू घोषित किया. इससे लोगों में भ्रम की स्थिति फैल गई और बहुत से लोग “दत्तात्रेय गोत्र” को भी इटली से आयातित समझने लगे.

जबकि, “दत्तात्रेय गोत्र” होता ही नहीं है बल्कि “अत्रि गोत्र” होता है जो कि एक शुद्ध भारतीय गोत्र है… और, इसकी जड़ें हमारे पौराणिक कथा से जुड़ती है.. दरअसल… हमारे पौराणिक कथा के अनुसार… प्राचीन काल काल में सात महाऋषि हुए है…. जिन्हें सप्तऋषि कहा जाता है. ये सप्तऋषि है – 1. वशिष्ठ, 2. विश्वामित्र, 3. कण्व, 4. भारद्वाज, 5. अत्रि, 6. वामदेव और 7.शौनक.


Bhagwan Dattatreya : इनमें से ऋषि अत्रि की पत्नी का नाम था सती अनुसुइया. ये वही सती अनुसूइया हैं… जिन्होंने, अपने तपोवल से एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव को नन्हा बालक बना दिया था.

इन्ही ऋषि अत्रि और अनुसुइया के तीन पुत्र हुए. दत्तात्रेय, दुर्वासा और चन्द्र देव.

ऋषि दत्तात्रेय को शैव मत को मानने वाले “शिव” के रूप में तथा वैष्णव मत को मानने वाले लोग “विष्णु” के रूप में पूजते है. और, चूंकि … ऋषि दत्तात्रेय में ईश्वर और गुरु दोनों रूप समाहित हैं इसीलिए उन्हें ‘परब्रह्ममूर्ति सद्गुरु’और ‘श्रीगुरुदेवदत्त’भी कहा जाता हैं.

भगवान दत्तात्रेय की जयंती मार्गशीर्ष माह के कृष्णपक्ष की दसवीं को मनाई जाती है. वे एक महान वैज्ञानिक थे और ऐसा कहा जाता है कि – पारे के शक्ति से हवाई जहाज को उड़ाने का ज्ञान उन्होंने ही खोजा था, जो आज भी आधुनिक विज्ञान के लिए शोध का बिषय है.

Bhagwan Dattatreya : इसके अलावा भी उन्होंने आयुर्वेद को अनेकों बहुमूल्य खोजें दी. भगवान दत्तात्रेय को नाथ संप्रदाय की नवनाथ परंपरा का भी अग्रज माना जाता है… और, यह भी मान्यता है कि रसेश्वर संप्रदाय के प्रवर्तक भी दत्तात्रेय ही थे.

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भगवान दत्तात्रेय ने वेद और तंत्र मार्ग का विलय कर एक ही धारा में जोड़ा था. वे प्रकृति का अध्ययन करते थे और प्रकति को ही अपना गुरु मानते थे.

और, चूंकि… उनको तीनों प्राचीन संप्रदाय (वैष्णव, शैव और शाक्त) का गुरु माना जाता है इसलिए इस त्रिवेणी के कारण ही प्रतीकस्वरूप उनके तीन मुख दर्शाएँ जाते हैं.

उनका अधिक समाय भारत के राज्य त्रिपुरा में बीता था और, त्रिगुण रखने वाले भगवान् दत्तात्रेय की कर्मभूमि के कारण ही उस क्षेत्र का नाम त्रिपुरा पड़ा था… ऐसा माना जाता है.

भगवान् परशुराम, शिवपुत्र कार्तिकेय, भक्त प्रहलाद, आदि उनके शिष्य रहे. कार्तवीर्यार्जुन को तंत्र विद्या एवं नागार्जुन को रसायन विद्या की प्राप्ति भी इनकी कृपा से ही प्राप्त हुई थी.

कहा जाता है कि- गुरु गोरखनाथ को आसन, प्राणायाम, मुद्रा और समाधि-चतुरंग योग का मार्ग भगवान दत्तात्रेय की भक्ति से प्राप्त हुआ था. भगवान दत्तात्रेय का उल्लेख पुराणों में मिलता है और, इन पर दो ग्रंथ हैं ‘अवतार-चरित्र’ और ‘गुरुचरित्र’… जिन्हें वेदतुल्य माना गया है.

Bhagwan Dattatreya : अब ये समझने वाली बात है कि… गोत्र अपने पूर्वजों से आता है और …. पप्पू के पिता और दादा पारसी थे…. जिनका गोत्र खुद उन्हें भी मालूम नहीं होगा. तो फिर, अचानक से इस भिंडी को अपना गोत्र कैसे मालूम पड़ गया ???

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ये और कुछ नहीं है बल्कि…. 2G, 3G, जीजा जी आदि के बाद अब ये नया “गोत्र घोटाला” है जिससे छिपकिली के DNA और इंसान के DNA को एक ही बताया जा सके.

इसीलिए , हमें अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि…जो गधा कल तक “आलू से काल्पनिक सोना बना रहा था… वो आज अपना काल्पनिक गोत्र बता कर हम सबको चूसिया बना रहा है”.

जय महाकाल…जय श्री राम, सनातन धर्म की जय, अधर्म का नाश हो !!!

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