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महात्मा नाथूराम गोडसे बलिदान दिवस – वर्तमान भारत हमेशा रहेगा महात्मा गोडसे का ऋणी, देश बचा गए महात्मा नाथूराम

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Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas
Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas

Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas : फर्जी इतिहासकारों और आज़ादी के बाद कांग्रेस सरकारों ने गाँधी नेहरु की मार्कटिंग करते हुए महात्मा गोडसे की छवि विलेन के रूप में बना दी, आप स्वयं जरा सोचिये की अगर किसी महान नेता को कोई सड़क पर गोली मारेगा, वो भी उसके हजारों प्रशंसको के बीच, तो क्या उग्र भीड़ उसकी लिंचिंग नहीं कर देगी ? पर महात्मा नाथूराम को तो किसी ने टच भी नहीं किया, उन्होंने तो गिरफ़्तारी दी, साफ़ है की जनता भी उनके साथ थी

आज 15 नवम्बर का दिन है, आज महानतम देशभक्त महात्मा नाथूराम गोडसे का आज है बलिदान दिवस, आज ही के दिन महात्मा नाथूराम को गंधासुर वध के कारण 15 नवम्बर 1949 को फांसी पर लटकाया दिया गया था, महात्मा नाथूराम ने देश को 3 हिस्सों में तोड़ने और फिर से पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिमी पाकिस्तान तक रास्ता बनाने की मंशा के कारण गंधासुर का वध किया


बता दें की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाया गया था , गाँधी ने सेकुलरिज्म के चक्कर में कट्टरपंथियों की बात को माना, जिसमे कट्टरपंथी चाह रहे थे की पूर्वी पाकिस्तान से लेकर पश्चिमी पाकिस्तान तक जाने के लिए भारत के बीचों बीच 20 किलोमीटर चौड़ा रास्ता दिया जाये

और इस रस्ते में गाँव भी बसे पर केवल मुसलमानो को ही रहने की इज़ाज़त दी जाए ताकि ये रास्ता पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिमी पाकिस्तान तक आने जाने के लिए मुसलमानो के लिए सुरक्षित रहे

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गंधासुर कट्टरपंथियों की इस मांग को भी मानने और वार्ता के लिए पश्चिमी पाकिस्तान जाने वाला था पर उस से पहले महात्मा नाथूराम ने गंधासुर वध कर दिया और देश को बचा लिया, महात्मा नाथूराम गोडसे न होते तो कुछ ऐसा नक्शा होता भारत का

Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas
Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas

ये जो लाइन आप देख रहे है वो, 20 किलोमीटर चौड़ा रास्ता है, जो पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिमी पाकिस्तान तक जाना था, और इस 20 किलोमीटर में केवल मुस्लिम ही रह सकते थे, ये रास्ता  पंजाब/राजस्थान से होता हुआ यूपी फिर बिहार, फिर बंगाल और अन्य में पूर्वी पाकिस्तान तक जाना था

महात्मा नाथूराम न होते तो आज देश ऐसा होता, महात्मा नाथूराम ने अपने प्राणों की चिंता नहीं की, उन्होंने देश को और बर्बाद होने से बचाने के लिए गंधासुर वध किया और गिरफ़्तारी दी, वो फरार नहीं हुए उन्होंने गंधासुर को सीने पर गोली मारी और गिरफ़्तारी दी ,

Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas : उन्हें गंधासुर वध के लिए 15 नवंबर 1949 को अम्बाला जेल में फांसी दे दी गयी, देश बचाते हुए उन्होंने अपने प्राणो का बलिदान दे दिया, आज के वर्तमान भारत के लिए महात्मा गोडसे ने जो किया अगर वो ऐसा न करते, तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते की इस देश का क्या होता, अंत तक वंदे मातरम कहते हुए देश बचाकर चले गए महात्मा नाथूराम

Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas
Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas

वो मरते मरते भी कह गए की मेरी अस्थियों को तबतक विसर्जित मत करना जबतक सिन्धु नदी फिर से भारत के ध्वज तले न बहे, आज भी महात्मा नाथूराम गोडसे की अस्थियों का विसर्जन नहीं हो सका है, उनकी अस्थियाँ पुणे में है

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Mahatma Nathuram Godse Balidan Diwas : आज 15 नवम्बर को हम महात्मा नाथूराम गोडसे बलिदान दिवस मना रहे है ताकि हम महात्मा नाथूराम गोडसे को याद कर सके और उनकी अंतिम इक्षा को पूरी करने का लक्ष्य मन में रख सके, हमे वापस अपनी भूमि चाहिए, जो की मलेछो के कब्जे में है, हमे भविष्य के लिए तैयारी करनी चाहिए ताकि महात्मा नाथूराम गोडसे का अस्थि विसर्जन सिन्धु नदी में हो सके जब सिन्धु नदी भारत के ध्वज तले बहे

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