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मोदी का राष्ट्रवाद – देश का फायदा, निकले विदेशी कंपनी के पसीने, चमचे नहीं समझ सकते राष्ट्रवाद

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Rupay vs Mastercard
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Rupay vs Mastercard : श्री राम मंदिर की गहमागहमी में एक महत्वपूर्ण समाचार पूरे सोशल मीडिया के परिदृश्य से गायब है कि…भारतीय रूपे कार्ड ने अमेरिकी मास्टर कार्ड की क़ायदे से ले ली 😂

वैसे तो मास्टरकार्ड और वीज़ा का नाम हम में से अधिकतर ने सुन रखा है और, जिनके भी पास क्रेडिट या डेबिट कार्ड है… उन्होंने इसका इस्तेमाल भी किया होगा. असल में ये एक पेमेंट प्रोसेसिंग तकनीक है जो कि हमारे ट्रान्जेक्शन के लिए बैंकों से कुछ पैसे लेती है.


दरअसल 2012 में मनमोहन सिंह सरकार और आरबीआई ने “रूपे कार्ड” लॉन्च किया था जो कि मास्टरकार्ड और वीसा कार्ड का देसी वर्जन था… लेकिन, विदेशी दबाब के कारण इसका प्रमोशन रोक दिया गया…!

बाद में मोदी सरकार ने बैंकिंग सेक्टर में इसे प्रमोट करना शुरु किया और जन-धन वाले अकाउंट्स के कारण इसके उपयोग और संख्या में अचानक से वृद्धि आई.

और, 2018 आते-आते इस कार्ड के प्रयोग का (संख्या का नहीं) ये आलम है कि पिछले चार सालों में भारत के एक अरब कार्डधारकों में से आधे रूपे कार्ड का प्रयोग करते हैं.

सिर्फ पिछले दो सालों में ही इसके प्रयोग की गति ऐसी तेज हुई है कि मास्टरकार्ड वालों को रुलाई आ रही है.

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इसका मुख्य कारण यह है कि पहले इन दो विदेशी कम्पनियों की इस क्षेत्र में डूओपॉली थी और हर ट्रान्जेक्शन पर लगने वाली फीस भारत से बाहर जाती थी.

लेकिन, मोदी ने लोगों के बीच “रुपे कार्ड” को लोकप्रिय बनाया और फिर ये कार्ड मात्र चार सालों में मास्टरकार्ड वालों की हालत पतली कर रही है.

Rupay vs Mastercard : फिर हालात ये हो गई कि मास्टरकार्ड के मालिक ट्रम्प के पास ये बताने के लिए पहुंच गए कि मोदी ने भारत में उनके बिजनेस को बर्बाद कर दिया है…और, वो लोगों को ‘देशभक्ति’ और ‘देश सेवा’ के नाम पर ‘रूपे कार्ड’ को इस्तेमाल करने कह रहा है.

आप ऐसी कम्पनियों की दुस्साहस देख कर दंग रह जाएंगे कि इन्हें “अमेरिका फ़र्स्ट” कहने वाले राष्ट्रपति के पास “इंडिया फ़र्स्ट” कहने वाले प्रधानमंत्री की शिकायत करनी पड़ रही है कि “भारत का पैसा” अमेरिका में “क्यों नहीं आ” रहा है.

मतलब ये उम्मीद लेकर शिकायत की जा रही है कि ट्रम्प इंडिया की बाँह मरोड़ेगा और कहेगा कि भारत के लोग भारतीय पेमेंट प्रोसेसर का प्रयोग न करें….बल्कि, अपना पैसा अमेरिका को दें.

मोदी ने ‘भीम’ और ‘रूपे’ कार्ड को प्रमोट किया है…और, कहा कि “हाँ, ये देश सेवा है क्योंकि आप जब रूपे इस्तेमाल करते हैं तो उस पैसे से सड़कें बनती हैं”.

और, मास्टरकार्ड के मालिक ने मोदी के इसी बयान का ज़िक्र करके अपनी सरकार से मोदी की शिकायत की है कि वो तो “देश सेवा” का नाम लेकर लोगों को उकसा रहा है.

कहने का मतलब है कि वे चाहते हैं कि भारत के लोग ज़िंदगी भर किसी न किसी उनकी ग़ुलामी करते रहें…और, यहाँ का पैसा वहाँ भेजते रहें.

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मुझे आश्चर्य होता है कि एक विदेशी कम्पनी ऐसा सोच भी कैसे लेती है कि भारतीय लोग अपने देश में बनाई सेवाओं का प्रयोग न करें क्योंकि इससे उनका बिजनेस खराब होगा…???

Rupay vs Mastercard : मोदी से आप खूब असहमति रखिए, लेकिन इस तरह की ख़बरों को सुनकर अच्छा लगता है कि विदेशियों को जहाँ तक संभव है, “बाँस” करते रहना चाहिए.

कई जगह आप बारगेनिंग कैपेसिटी में नहीं होते हैं और, आपको उनके सामने झुकना पड़ता है.

लेकिन, इसका मतलब ये तो नहीं कि आदमी खड़ा होना ही छोड़ दे.

जय महाकाल…!!!

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