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हर फिरके की अलग मस्जिद, भेदभाव का आलम ये की अब सडक भी अलग, इस्लाम में अंतर तक जातिवाद

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casteism in islam
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casteism in islam : हंसी आती है नकारा भीमटों पर जब फिकरो में बंटा इस्लाम दलित और मुस्लिम एकता की तूती बजाते हैं। भीमटें नहीं जानते की दलितों से ज्यादा भेदभाव इस्लाम में है ! दुसरे फिरकों की हत्या, उनके इमामबाड़े तक को गैर इस्लामिक मान कई इस्लामिक मुल्क में बमों से उड़ा देना सवाब मानते हैं ।

नहीं मानते मेरी बात को ? मुझे पता था । इस ख़बर के साथ साथ इंदौर के सदर बाजार थाना क्षेत्र की ख़बर सुनिए ! कुछ ही दिनों पहले वहां बरेलवी मुसलमानों ने आवेदन दिया की अहले हदीस मुसलमान एक स्थान पर मस्जिद बना रहे हैं जबकी वह ज़मीन मदरसे के लिए आबंटीत थी !


पुलिस अधिकारीयों ने निर्माण रुकवा कर दोनों पक्षों को बैठक की और जब अहले हदीस वालों ने वादा किया की वह मस्जिद नहीं मदरसा ही बनाएंगे तब निर्माण पुनः प्रारंभ हुआ ! अब बरेलवी भाई अपने लठ्ठों को तेल पिलाया रहे हैं की जहां इन्होंने अजान दी या नमाज पढ़ी तो सबक सिखाओ दिया जाएगा 😂 !

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इसी इंदौर में सभी फिरके के मुसलमान मिलकर शियाओं को उनकी रजिस्टरड जमीं पर इमामबाड़ा तामिर नहीं करने दे रहे !

दलितों को या किसी भी गैर मुस्लिम को जातिय -भेदभाव रहीत मजहब का झांसा देकर इस्लाम कबुल ने का दावत देने वाले मुसलमान बताएं की अगर वह इस्लाम की दावत कबुल बरेलवी मुसलमान बने तो आप इन्हें कब्र पुजक कहेंगे , सुफी बने तो यह नचैये बन मुर्शीद की पनाह लेंगें जो आपके हिसाब से इस्लाम विरोधी है !

शिया बने तो धोडा पुजक और खुद का बंदर समान सिना ठोकने वाले मातमी कहलाएंगें और देवबंद , वहाबी , अहले हदीस तो आपकी नज़रों में है ही खारिजे इस्लाम 😝

बोहरा बने तो आप ही लोगों को कहेंगे की राफजी खाना थुक कर मेहमानों को परोसते हैं 😪 !

शिया खटमल हैं, सुन्नी मच्छर है , वहाबी चील है , अहले हदीस पिस्सू है , सुलह कुल्ली मक्खी है और सुफी नचईया है , यह सब नाम मुसलमानों के अलग अलग फिरकों ने ही एक – दूसरे को दिये है या कोई हिंदू या यहुदी देने आए थे 😉 ?

बेचारे इस्लाम अपनाने वालों को तो यह भी सोचना होगा की वह जो फिरका अपनाएंगें उसकी मस्जिद भी वहां है की नहीं 😯 ?

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मस्जिद भी अगर है तो कब्रस्तान भी होना चाहिए क्योंकि हमारे में तो हर फिरके का मुर्दा भी गड़ता अपने ही कब्रस्तान में है , हम लोग कौन काफ़िर है की हिन्दू की तरह एक ही शमशान को अंतिम विश्रामालय मान लें ? और तो और वहां बौद्ध और सिखों को भी जगह दे दें ? 😏 !

अगर कोई मुसलमान आपको इस्लाम अपनाने की दावत दे तो आप एक काम करें की आपको मुसलमान बनाने को आतुर हर फिरके वाले मौलवियों के हाथो में डंडा दे दें 😉 और एलान कर दें की सब मौलवी मिल कर तय करें की जन्नत कौन सा फिरका जाएगा ? फिर जो फिरके का मौलवी जिता हम वही फिरके के मुसलमान बनेंगें 😂😂😂 !

जब आखरी बचा जन्नती मौलवी आपके पास आए फिर उसे आप सबक सिखा देना 😉 । सारी समस्या हल 😂😂😂

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