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दिवाली के पटाखों पर नियम बनाना गलत था, सुप्रीम कोर्ट को हद में रहकर करना चाहिए काम : मार्कंडेय काटजू, पूर्व SC जज

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markandey katju on diwali crackers
markandey katju on diwali crackers

markandey katju on diwali crackers : इस देश का बहुसंख्यक समाज बहुत ही विशाल ह्रदय का है, और इस देश के बहुसंख्यक समाज को इस देश से भी बहुत प्यार है, ये देश उनका ही घर है 

पर अगर बहुसंख्यक समाज के गले को ही दबाया जाएगा तो वो तो जवाब देगा ही, और ऐसा ही दिवाली पटाखों को लेकर हुआ, जहाँ देश की सुप्रीम कोर्ट ने वामपंथियों की याचिका पर पटाखों पर अपने नियम बना दिए, वैसे तो कोर्ट आये दिन बहुसंख्यक समाज के त्यौहार इत्यादि में आये दिन दखल दे रही है


कोर्ट ने लोगो को कहा की तुम्हे पटाखा सिर्फ 8 से 10 के बीच ही जलाना है, कोर्ट के आदेश के बाद कुछ लोगो की देश में गिरफ्तारियां भी की गयी, पर लोगों ने दिवाली वाले दिन कोर्ट को बता दिया की इस देश में कोर्ट से भी ऊपर जनता है, कोर्ट जनता के लिए है न की जनता कोर्ट के लिए है

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सुप्रीम कोर्ट ने खुद का ही मजाक बनवा लिया, और लोगो ने दिवाली पर जमकर जश्न मनाया आतिशबाजी की, सुप्रीम कोर्ट के दिवाली पटाखे वाले फैसला का विरोध खुद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मर्केंडेय काटजू ने किया

काटजू ने सुप्रीम कोर्ट के दिवाली पटाखे पर नियम को गलत बताया और ये भी कहा की कोर्ट को अपनी हद में रहकर ही काम करना चाहिए, देखिये काटजू का त्वीट

असल में बरखा दत्त नाम की हिन्दू विरोधी पत्रकार पटाखों पर हिन्दुओ को कोस रही थी और कह रही थी की हिन्दुओ ने कोर्ट की अवमानना की है, इसपर काटजू ने जवाब दिया

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उन्होंने कहा की दिवाली के टाइम को या पटाखों के टाइम को फिक्स करने का कोई कानून देश में नहीं है, और कानून बनाना सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है, ये संसद और विधानसभा का काम है, दिवाली पटाखे पर कोर्ट ने कानून बनाने की कोशिश की जिसका नतीजा सबके सामने है, कोर्ट का कानून नहीं चला

कोर्ट को इस देश में कानून बनाने का कोई अधिकार है ही नहीं, कानून सिर्फ संसद या विधानसभा ही बना सकते है, पर अगर कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जाकर काम करने लगेगा तो उसका पालन कोई नहीं करने वाला

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